पुणे नगर निगम टेंडर विवाद: बीजेपी की दो महिला नेताओं के बीच जमकर हुई नोकझोंक
पुणे नगर निगम में ₹3 करोड़ के छात्रावास टेंडर पर बीजेपी नेताओं राजश्री काले और रोहिणी चिमटे के बीच तीखी झड़प। कमीशन के आरोपों के बाद मची प्रशासनिक खलबली।

BJP corporators clash Pune Municipal Corporation : महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे के नगर निगम प्रशासन में उस समय सनसनी फैल गई, जब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की दो दिग्गज महिला नेता सार्वजनिक रूप से आपस में भिड़ गईं। मामला बानेर इलाके में बन रहे एक आदिवासी बालिका छात्रावास के ₹3 करोड़ के टेंडर से जुड़ा है, जिसने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। पुणे नगर निगम के भवन विभाग के भीतर बुधवार को हुई इस तीखी झड़प ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया, बल्कि सत्ताधारी दल के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को भी चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। पूर्व पार्षद राजश्री काले और वर्तमान पार्षद रोहिणी चिमटे के बीच हुई इस नोकझोंक का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
विवाद की जड़ बानेर में लगभग बनकर तैयार हो चुके आदिवासी छात्रावास के अंतिम चरण के काम का टेंडर है। पूर्व पार्षद राजश्री काले ने रोहिणी चिमटे पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाते हुए दावा किया कि चिमटे ठेकेदार से 'कमीशन' की मांग कर रही हैं और इसी वजह से जानबूझकर परियोजना के काम में बाधा डाली जा रही है। काले के अनुसार, छात्रावास का काम लगभग अंतिम चरण में है, लेकिन कथित भ्रष्टाचार और लालच के चलते इसे पूरा होने से रोका जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर पार्षद रोहिणी चिमटे ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा। चिमटे का कहना है कि स्थानीय निवासियों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने केवल सुरक्षा दीवार (Boundary Wall) का काम पहले पूरा करने की मांग की थी, जिसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान नगर निगम कार्यालय में भारी अफरा-तफरी का माहौल रहा। दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच भी तीखी बहस हुई, जिसने देखते ही देखते हंगामे का रूप ले लिया। वायरल वीडियो में दोनों पक्षों को एक-दूसरे पर चिल्लाते और आरोप लगाते हुए साफ देखा जा सकता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद विपक्षी दलों और जागरूक नागरिकों ने पुणे नगर निगम में फैले कथित भ्रष्टाचार पर कटाक्ष करना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग इस घटना की तुलना 'कमीशन राज' से कर रहे हैं और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल, इस पूरे विवाद पर पुणे नगर निगम (PMC) के वरिष्ठ अधिकारियों या भारतीय जनता पार्टी के आला नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, आदिवासी समुदाय की बालिकाओं के शिक्षा और निवास से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का टेंडर विवादों में घिरने से इसकी समयसीमा पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह घटना दर्शाती है कि कैसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और आपसी मतभेद जनहित के प्रोजेक्ट्स की राह में रोड़ा बन सकते हैं। पुणे का यह 'टेंडर वॉर' अब केवल दो नेताओं की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि इसने नगर निगम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
