उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े यादव परिवार में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति और अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव का लखनऊ में निधन हो गया। मौत से पहले दंपति के बीच सार्वजनिक विवाद, तलाक की धमकियां और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने इस मामले को चर्चा का विषय बना दिया है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रखने वाले यादव परिवार का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में है। इस बार वजह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि बेहद निजी, भावनात्मक और विवादों से घिरी हुई है। भारतीय जनता पार्टी की नेता और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का लखनऊ में निधन हो गया है। 38 वर्षीय प्रतीक यादव, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के सौतेले भाई थे और उनकी अचानक मौत ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक कई सवाल और चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

बुधवार सुबह करीब 6 बजे प्रतीक यादव को लखनऊ सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जानकारी के अनुसार वह पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और निजी अस्पतालों में भी उनका इलाज चल रहा था। हालांकि उनकी मौत को लेकर किसी प्रकार की आपराधिक आशंका या साजिश की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यादव परिवार की आंतरिक परिस्थितियों और पहले सामने आए सार्वजनिक विवादों ने इस घटना को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है।

एक प्रेस वार्ता के दौरान साथ बैठे प्रतीक यादव और अपर्णा यादव

कौन हैं यादव परिवार की “छोटी बहू”?

अपर्णा यादव, जिन्हें उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली यादव परिवार की “छोटी बहू” के रूप में जाना जाता है, मूल रूप से उत्तराखंड से संबंध रखती हैं। 1 जनवरी 1990 को जन्मी अपर्णा ने अपनी पढ़ाई लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल और लोरेटो कॉन्वेंट इंटर कॉलेज से की। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर से इंटरनेशनल रिलेशंस एंड पॉलिटिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की। राजनीति के साथ-साथ वह संगीत में भी रुचि रखती हैं और भातखंडे संगीत संस्थान से शास्त्रीय एवं अर्ध-शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण ले चुकी हैं।

साल 2011 में अपर्णा यादव ने प्रतीक यादव से विवाह किया था। प्रतीक यादव राजनीति से दूर रहकर फिटनेस और व्यवसाय से जुड़े रहे, जबकि अपर्णा धीरे-धीरे राजनीतिक पहचान बनाती चली गईं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत समाजवादी पार्टी से की थी और 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लखनऊ कैंट सीट से चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उन्हें भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। बाद में जनवरी 2022 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों की सार्वजनिक प्रशंसा करते हुए उनका भाजपा में शामिल होना उस समय बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना गया था, क्योंकि वह उसी यादव परिवार का हिस्सा थीं जिसकी पहचान लंबे समय तक समाजवादी पार्टी से जुड़ी रही।

अपर्णा यादव सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रही हैं। वह पशु प्रेमी के रूप में जानी जाती हैं और “बी अवेयर” नामक एनजीओ चलाती हैं, जो पशु कल्याण से जुड़े मुद्दों पर काम करता है। इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर भी वह कई अभियानों से जुड़ी रही हैं। सितंबर 2024 में उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

लेकिन राजनीतिक सफलता और सार्वजनिक पहचान के बीच उनकी निजी जिंदगी पिछले कुछ महीनों में गंभीर विवादों के कारण सुर्खियों में रही। इसी वर्ष जनवरी में प्रतीक यादव ने अपने सत्यापित इंस्टाग्राम अकाउंट से कई पोस्ट साझा करते हुए अपर्णा यादव पर बेहद गंभीर निजी आरोप लगाए थे। उन्होंने अपर्णा को “परिवार तोड़ने वाली” बताते हुए कहा था कि वह केवल प्रसिद्धि, प्रभाव और राजनीतिक महत्वाकांक्षा चाहती हैं। एक पोस्ट में उन्होंने यहां तक लिखा था कि वह जल्द ही अपर्णा से तलाक लेने जा रहे हैं क्योंकि उन्होंने परिवारिक रिश्तों को नुकसान पहुंचाया है।

प्रतीक यादव द्वारा अपर्णा यादव के विरुद्ध किया गया सोशल मीडिया पोस्ट

प्रतीक यादव ने अपने पोस्ट में दावा किया था कि उनकी मानसिक स्थिति पर भी इन परिस्थितियों का बुरा असर पड़ा है। उन्होंने लिखा था कि उनके माता-पिता और भाई के साथ उनके रिश्ते टूट चुके हैं और इसके लिए उन्होंने अपर्णा को जिम्मेदार ठहराया। इन पोस्ट्स ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी थी। हालांकि उस समय उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने इस पूरे मामले को परिवार का निजी मामला बताते हुए किसी औपचारिक कार्रवाई से इनकार किया था।

विवादों के कुछ समय बाद हालात बदलते नजर आए। प्रतीक यादव ने अपने पुराने पोस्ट हटा दिए और एक वीडियो साझा कर कहा कि बातचीत के बाद दोनों के बीच मामला सुलझ गया है। बाद में उन्होंने अपर्णा यादव के साथ तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें “ऑल इज गुड” और “हेटर्स गो टू हेल” जैसे कैप्शन लिखे गए थे। इससे यह संकेत मिला कि दंपति के बीच संबंध सामान्य हो चुके हैं।

प्रतीक यादव की मौत के समय अपर्णा यादव असम में आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल थीं। बताया जा रहा है कि वह उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग से जुड़े कार्यों के सिलसिले में वहां गई थीं। फिलहाल किसी भी जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया है और न ही अधिकारियों ने किसी संदिग्ध परिस्थिति की पुष्टि की है। इसके बावजूद राजनीति में धारणा और सार्वजनिक चर्चा अक्सर तथ्यों से पहले आगे बढ़ जाती है, और यही कारण है कि प्रतीक यादव की मौत के साथ अपर्णा यादव का नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है।

यादव परिवार की राजनीति हमेशा उत्तर प्रदेश की सत्ता और सामाजिक समीकरणों के केंद्र में रही है। ऐसे में परिवार के भीतर उठे निजी विवाद, सार्वजनिक आरोप, सुलह की कोशिशें और अब अचानक हुई मौत ने इस पूरे घटनाक्रम को केवल पारिवारिक मामला नहीं रहने दिया है। यह घटना न केवल एक राजनीतिक परिवार की निजी त्रासदी बन गई है, बल्कि सत्ता, रिश्तों और सार्वजनिक जीवन के दबावों के बीच टूटते संबंधों की भी एक गंभीर कहानी बनकर सामने आई है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story