PM मोदी के बाद गोवा CM प्रमोद सावंत का बड़ा फैसला ; काफिला घटाकर EV को दिया बढ़ावा
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने प्रशासनिक सादगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपने सरकारी काफिले को घटाकर इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग की घोषणा की है। साथ ही विदेशी यात्रा पर नियंत्रण की नीति भी सामने आई है, जो राज्य की नई प्रशासनिक प्राथमिकताओं और वित्तीय अनुशासन को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत
गोवा के प्रशासनिक ढांचे में हाल ही में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है, जब मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने सरकारी कार्यशैली में सादगी, लागत नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए कई अहम फैसलों की घोषणा की। ये कदम न केवल प्रशासनिक अनुशासन की दिशा में संकेत माने जा रहे हैं, बल्कि राज्य की विकास नीति में बदलते दृष्टिकोण को भी दर्शाते हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों और हालिया बयानों के अनुसार, यह निर्णय देश में बढ़ती ऊर्जा लागत और सरकारी व्यय में संयम बरतने की व्यापक अपील के संदर्भ में लिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर दिए गए संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के संदेश के बाद राज्य स्तर पर भी इस प्रकार की पहलें तेज हुई हैं।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने अपने आधिकारिक काफिले में उल्लेखनीय कटौती करते हुए इसे पहले के लगभग छह वाहनों से घटाकर तीन वाहनों तक सीमित कर दिया है। कई अवसरों पर वे केवल एक सुरक्षा एसयूवी के साथ यात्रा करते देखे जा रहे हैं। इस निर्णय को सरकारी खर्च में कटौती और ईंधन संरक्षण की दिशा में एक व्यावहारिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री का यह भी कहना रहा है कि जब प्रधानमंत्री स्वयं अपने काफिले में संयम दिखा रहे हैं, तो राज्य नेतृत्व की भी यही जिम्मेदारी बनती है कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि “जब प्रधानमंत्री ने अपने काफिले को घटाया है, तो यह मेरी भी जिम्मेदारी है… मैंने अपने साथ केवल एक वाहन रखा है।”
इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि वे जल्द ही आधिकारिक आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग शुरू करेंगे। इसके लिए वे व्यक्तिगत रूप से एक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की योजना भी बना रहे हैं, जिसका उपयोग सरकारी कार्यों के लिए किया जाएगा। यह निर्णय गोवा सरकार की उस व्यापक नीति के अनुरूप है, जिसके तहत राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। राज्य में पहले से ही इलेक्ट्रिक टैक्सियों और किराए के वाहनों को प्रोत्साहन देने, ईवी अपनाने पर सब्सिडी और सरकारी बेड़े को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने जैसी नीतियाँ लागू की जा चुकी हैं।
इसी बीच, गोवा सरकार की “नो फॉरेन ट्रैवल” नीति को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य सरकार ने आधिकारिक कार्यों के लिए विदेशी यात्रा को सीमित करने या समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इस नीति का उद्देश्य विदेशी मुद्रा व्यय को कम करना, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए देश के भीतर या राष्ट्रीय स्तर के विकल्पों को बढ़ावा देना तथा प्रशासनिक दक्षता को स्थानीय संसाधनों के माध्यम से मजबूत करना बताया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक दिशानिर्देश और पूर्ण नीति दस्तावेज व्यापक रूप से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
इन सभी निर्णयों को मिलाकर देखा जाए तो गोवा सरकार की प्रशासनिक दिशा में एक स्पष्ट बदलाव उभरता है, जो वित्तीय अनुशासन, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और प्रतीकात्मक शासन शैली पर आधारित प्रतीत होता है। काफिले में कटौती, इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ता रुझान और विदेशी यात्राओं पर संभावित नियंत्रण जैसे कदम राज्य की नीति प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत देते हैं।
गोवा जैसे पर्यटन-प्रधान राज्य में, जहां परिवहन, ईंधन खपत और वाहन घनत्व पहले से ही उच्च स्तर पर हैं, ऐसे निर्णयों का प्रभाव और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह पहल न केवल ईंधन निर्भरता को कम करने की दिशा में है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और प्रशासनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की ओर भी एक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
