Uddhav Thackeray 6 Rebels MPs : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ऐसा सियासी भूचाल आया है जिसने उद्धव ठाकरे गुट की चूलें हिलाकर रख दी हैं। शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के अचानक पार्टी छोड़ने और बगावत का झंडा बुलंद करने के पीछे की असली और बेहद चौंकाने वाली वजह अब पूरी तरह साफ हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इस टूट को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब इन बागी सांसदों द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के समक्ष रखे गए आधिकारिक प्रस्ताव ने पूरे घटनाक्रम की इनसाइड स्टोरी को बेनकाब कर दिया है। इस पुख्ता जानकारी के सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि उद्धव सेना के भीतर सुलग रही असंतोष की चिंगारी अब एक बड़े सियासी विस्फोट में तब्दील हो चुकी है।

इस पूरे सियासी ड्रामे और बगावत की बुनियाद में कांग्रेस के साथ विलय का वो डर है, जिसने इन छह सांसदों को पाला बदलने पर मजबूर कर दिया। बागी सांसदों द्वारा पारित और लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे गए आंतरिक प्रस्ताव में साफ तौर पर आशंका जताई गई है कि भविष्य में शिवसेना यूबीटी का वजूद खत्म करके उसका कांग्रेस में विलय किया जा सकता है। सांसदों ने इस कदम को वैचारिक रूप से पूरी तरह आत्मघाती बताते हुए प्रस्ताव में कड़े शब्दों में लिखा है कि श्रद्धेय बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना और इसकी विचारधारा का निर्माण कांग्रेस में विलीन होने के लिए कतई नहीं किया था। कांग्रेस विरोधी राजनीति की नींव पर खड़ी हुई पार्टी को उसी के पाले में खड़ा देख सांसदों का सब्र जवाब दे गया।

पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के केंद्र में शिवसेना यूबीटी के फायरब्रैंड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत का एक हालिया बयान भी रहा है, जिसने आग में घी डालने का काम किया। प्रस्ताव के मुताबिक, बागी सांसदों ने संजय राउत की कार्यशैली और उनके बयानों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। दरअसल, संजय राउत ने कुछ समय पहले तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी को कांग्रेस में विलय करने की सार्वजनिक सलाह दे डाली थी। राउत के इसी बयान के बाद से इन सांसदों के मन में यह गहरा डर बैठ गया कि जो नेतृत्व दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों को कांग्रेस में मिलने की वकालत कर रहा है, वह आगे चलकर खुद की पार्टी का विलय भी कांग्रेस में करा सकता है। इसी डर और आशंका ने सांसदों के मन में पार्टी नेतृत्व की मंशा को लेकर गहरे सवाल खड़े कर दिए।

कानूनी और आधिकारिक पहलुओं पर गौर करें तो सांसदों ने अपने प्रस्ताव में साफ तौर पर लिखा है कि इन्हीं गंभीर वजहों और आत्मघाती राजनीतिक फैसलों के चलते अब उनका पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं रह गया है। इसी टूटे हुए भरोसे को आधार बनाकर बागी सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने और अलग होने का अंतिम फैसला लिया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी पहलू यह है कि इन बागी सांसदों ने खुद को लोकसभा में किसी अलग या स्वतंत्र समूह के रूप में मान्यता देने की मांग नहीं की है। मीडिया में चल रही स्वतंत्र गुट की खबरों के उलट, सांसदों के प्रस्ताव के अनुसार उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली 'शिवसेना' में अपने गुट के पूर्ण विलय का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने रखे गए इस प्रस्ताव के बाद अब दिल्ली से लेकर मुंबई तक की सियासत गर्मा गई है। इस बड़े घटनाक्रम के दूरगामी परिणाम केवल उद्धव ठाकरे की पार्टी के भविष्य तक सीमित नहीं रहने वाले, बल्कि यह आगामी चुनावों और महाराष्ट्र के पूरे राजनीतिक समीकरण को बदलकर रख देगा। बालासाहेब ठाकरे के नाम और विरासत की दुहाई देकर शिंदे गुट में शामिल हुए ये 6 सांसद अब उद्धव ठाकरे के बचे-खुचे सियासी गढ़ को ढहाने की तैयारी में हैं। एक तरफ जहां उद्धव सेना इस झटके से उबरने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ इस बगावत ने यह साबित कर दिया है कि महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी में वैचारिक मतभेद किस कदर हावी हो चुके हैं, जिसका खामियाजा अब उद्धव ठाकरे को भुगतना पड़ रहा है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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