हक की लड़ाई या कानून का उल्लंघन? दिल्ली की सड़कों पर कांग्रेस और पुलिस के बीच तीखी झड़प'

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली की सड़कें आज एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियों और भारी हंगामे की गवाह बनीं। कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित 'मनरेगा बचाओ संग्राम' प्रदर्शन के दौरान दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के अध्यक्ष देवेंद्र यादव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इस प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन ने पहले ही कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे, लेकिन कार्यकर्ताओं के जोश और पुलिस की घेराबंदी के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई। 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय के बाहर का नजारा आज किसी किलेबंदी जैसा नजर आया।

प्रदर्शन का मुख्य कारण: 'मनरेगा बचाओ संग्राम'

कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के बजट में कटौती और श्रमिकों के भुगतान में हो रही देरी के खिलाफ इस 'संग्राम' का आह्वान किया था। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार इस महत्वपूर्ण योजना को कमजोर कर रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।

  • कार्यकर्ताओं का हुजूम: सुबह से ही दिल्ली के अलग-अलग कोनों से कांग्रेस कार्यकर्ता झंडे और बैनर लेकर पार्टी मुख्यालय पहुंचने लगे थे।
  • बैरिकेडिंग और घेराबंदी: प्रदर्शनकारियों को संसद या अन्य संवेदनशील इलाकों की ओर बढ़ने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बहुस्तरीय बैरिकेडिंग कर रखी थी।
  • हिरासत की कार्रवाई: जैसे ही देवेंद्र यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स लांघने की कोशिश की, पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया और बस के जरिए अज्ञात स्थान पर ले गई।

कानूनी शिकंजा: धारा 163 (BNS) लागू

कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन ने इस बार बेहद सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस मुख्यालय और आसपास के क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 (जो पूर्व में धारा 144 के समान है) लागू कर दी है।

  • निषेधाज्ञा: इस धारा के लागू होने के बाद पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • भारी सुरक्षा बल: दिल्ली पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की टुकड़ियों को भी 24 अकबर रोड पर तैनात किया गया है।
  • ड्रोन से निगरानी: भीड़ पर नियंत्रण और स्थिति का जायजा लेने के लिए पुलिस ड्रोन कैमरों का भी सहारा ले रही है।

आधिकारिक प्रतिक्रिया और राजनीतिक माहौल

कांग्रेस नेतृत्व ने इस पुलिसिया कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है, जिसे सरकार दबाने की कोशिश कर रही है। वहीं, पुलिस सूत्रों का कहना है कि बिना अनुमति के भीड़ जमा होने और निषेधाज्ञा के उल्लंघन के कारण यह कार्रवाई आवश्यक थी।

लोकतंत्र में असहमति की आवाज

दिल्ली में आज का यह घटनाक्रम केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह आगामी चुनावी सुगबुगाहट और विपक्ष की आक्रामकता का भी संकेत है। देवेंद्र यादव की हिरासत और 24 अकबर रोड पर लगी पाबंदियां यह दर्शाती हैं कि सत्ता और विपक्ष के बीच मनरेगा जैसे बुनियादी मुद्दों पर खाई और गहरी होती जा रही है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस का यह 'संग्राम' दिल्ली की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर क्या मोड़ लेता है।

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