प्रधानमंत्री वाराणसी में देश के सबसे बड़े सिग्नेचर ब्रिज की रखेंगे आधारशिला

वाराणसी की पावन धरा एक बार फिर ऐतिहासिक परिवर्तन की साक्षी बनने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र के 52वें दौरे के दौरान काशी और पूरे पूर्वांचल के लिए विकास का एक नया अध्याय लिखने आ रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण करीब 7000 करोड़ रुपये की मेगा परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण होगा, जो न केवल यातायात की सुगमता को बढ़ाएंगे, बल्कि वाराणसी को वैश्विक स्तर के आधुनिक बुनियादी ढांचे से सुसज्जित करेंगे। यह दौरा काशी की बदलती पहचान और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं के बीच एक सेतु की तरह देखा जा रहा है।

इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 2600 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला देश का सबसे बड़ा डबल डेकर सिग्नेचर ब्रिज है। 1074 मीटर लंबे इस पुल को 'परिवहन संगम' परियोजना के तहत निर्मित किया जाएगा, जो अत्याधुनिक केबल-स्टे तकनीक का एक बेजोड़ उदाहरण होगा। इस पुल की अनूठी विशेषता इसका डबल डेकर होना है, जिसमें निचले हिस्से में चार रेलवे ट्रैक होंगे और ऊपरी हिस्से पर छह लेन का सड़क मार्ग संचालित होगा। यह संरचना मौजूदा मालवीय पुल के समानांतर बनाई जा रही है, जो वाराणसी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से जोड़ने के साथ-साथ बिहार और पश्चिम बंगाल तक की कनेक्टिविटी को क्रांतिकारी रूप से सुगम बना देगी।

तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो यह ब्रिज 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति को सहन करने में सक्षम होगा और इसे कुल आठ पिलर तथा दस स्पैन पर टिकाया जाएगा। यह परियोजना न केवल ईंधन की बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी का माध्यम बनेगी, बल्कि इसके निर्माण के दौरान लगभग दस लाख मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है। रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में सुधार और यात्रियों के समय की बचत इस निवेश का सबसे बड़ा लाभ साबित होगी।

विकास की इन ईंटों के साथ सामाजिक सशक्तिकरण का रंग भरने के लिए बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के मैदान में 'नारी शक्ति महोत्सव' का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन की कमान पूरी तरह से महिलाओं के हाथों में होगी, जिसमें 50 हजार से अधिक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। यह आयोजन एक संदेश है कि बुनियादी ढांचे का विकास और सामाजिक भागीदारी साथ-साथ चलनी चाहिए। प्रधानमंत्री का यह दौरा वाराणसी को न केवल धर्म और आध्यात्म की राजधानी बनाए रखेगा, बल्कि इसे आधुनिक भारत के विकास मॉडल के रूप में भी स्थापित करेगा, जिसका प्रभाव आने वाले कई दशकों तक समूचे पूर्वांचल पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित होगा।

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Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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