प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक स्लोवाकिया दौरे में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला, जहां उन्होंने बिहार की पारंपरिक मिठाई ठेकुआ सहित हस्तशिल्प, आयुर्वेदिक ग्रंथ और सांस्कृतिक कलाकृतियां उपहार में दीं। यह दौरा भारत-स्लोवाकिया संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला साबित हुआ।

स्लोवाकिया की धरती पर भारत की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं की छाप उस समय स्पष्ट रूप से देखने को मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऐतिहासिक प्रथम राजकीय दौरे के दौरान भारतीय संस्कृति की विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। 14 से 16 जून 2026 के बीच हुए इस ऐतिहासिक दौरे में पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के शीर्ष नेतृत्व और संसद के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ मुलाकातों के दौरान भारत की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाने वाले पारंपरिक उपहार भेंट किए।

इस दौरे का सबसे विशेष और चर्चित पहलू बिहार की पारंपरिक मिठाई ‘ठेकुआ’ का उपहार के रूप में दिया जाना रहा, जिसने न केवल भारतीय क्षेत्रीय संस्कृति की पहचान को उजागर किया बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक विविधता को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में आयोजित आधिकारिक द्विपक्षीय वार्ताओं और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठकों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाक संसद के अध्यक्ष सहित अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों को यह उपहार सौंपा। यह उपहार केवल औपचारिक भेंट नहीं था, बल्कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।

प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए उपहारों के पैकेज में बिहार की पारंपरिक मिठाई ठेकुआ के साथ-साथ भारत के विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक हस्तशिल्प वस्तुएं भी शामिल थीं। इनमें डोकरा धातु शिल्प और कश्मीरी कारीगरी जैसी प्रसिद्ध कला परंपराओं के नमूने प्रमुख थे। इसके अलावा प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ भी उपहार स्वरूप प्रस्तुत किए गए, जो भारत की ज्ञान परंपरा और चिकित्सा विज्ञान की प्राचीन विरासत का प्रतीक हैं। भारतीय वस्त्र कला और लोक परंपराओं को दर्शाने वाली सांस्कृतिक कलाकृतियां भी इस उपहार सूची का हिस्सा रहीं।

बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की पहचान मानी जाने वाली ठेकुआ मिठाई न केवल एक पारंपरिक व्यंजन है, बल्कि इसका गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी है। यह विशेष रूप से छठ पूजा जैसे प्रमुख त्योहार के दौरान श्रद्धा और परंपरा के साथ तैयार की जाती है। गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी, घी और नारियल से बनी यह मिठाई भारतीय घरों में पवित्रता, आस्था और पारिवारिक परंपरा का प्रतीक मानी जाती है। इसी सांस्कृतिक महत्व के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक विशेष पहचान के रूप में प्रस्तुत किया गया।

यह दौरा इसलिए भी ऐतिहासिक माना गया क्योंकि यह स्वतंत्रता के बाद से किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली राजकीय यात्रा थी। इस यात्रा के दौरान भारत और स्लोवाकिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करते हुए उन्हें व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने पर सहमति जताई। दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष तकनीक, विनिर्माण क्षेत्र और ऊर्जा सहयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेल्लेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको सहित शीर्ष नेतृत्व से भी उच्चस्तरीय वार्ताएं कीं। इन बैठकों में वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने और आपसी संबंधों को नई दिशा देने पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी को स्लोवाकिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया गया, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों का प्रतीक माना गया।

यह पूरा घटनाक्रम भारत की उस कूटनीतिक रणनीति को दर्शाता है जिसमें सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और क्षेत्रीय पहचान को वैश्विक संबंधों को मजबूत करने के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। स्लोवाकिया दौरे में दिया गया ठेकुआ केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि भारत की जड़ों से जुड़ी सांस्कृतिक पहचान का अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व बनकर उभरा है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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