प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा और जयराम रमेश का तंज: जानिए क्या है पूरा मामला|
प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स में कछुए को खाना खिलाया, जिस पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 2008 के डाक टिकट का जिक्र कर राजनीतिक तंज कसा।

फोटो में दाईं ओर प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स में अल्डाबरा जाइंट कछुए को खाना खिलाते हुए, बाईं तरफ कांग्रेस सांसद जयराम रमेश दिखाई दे रहे हैं |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सेशेल्स यात्रा के दौरान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा के तहत, प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ नेशनल बॉटनिकल गार्डन का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री की एक तस्वीर विशेष रूप से सुर्खियों में रही, जिसमें वे 194 साल के 'अल्डाबरा जाइंट कछुए' को खाना खिलाते हुए नजर आए। प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के 'गोल्डन जुबली नेशनल डे' समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने गए थे।
इस घटना के बाद भारत में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के माध्यम से निशाना साधा है। जयराम रमेश ने अपनी पोस्ट में इस बात का उल्लेख किया कि डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने 2 अगस्त 2008 को ही इस 'अल्डाबरा जाइंट कछुए' पर एक डाक टिकट जारी कर दिया था। कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में इसे लेकर प्रधानमंत्री के प्रयासों पर कटाक्ष किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस कछुए के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इन कछुओं का भारत और सेशेल्स की दोस्ती से गहरा नाता है। उन्होंने जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2014 में सेशेल्स ने इनमें से दो कछुए भारत के कोलकाता स्थित अलीपुर चिड़ियाघर को उपहार के रूप में दिए थे। इसके अतिरिक्त, कुछ समय बाद सेशेल्स सरकार ने हैदराबाद चिड़ियाघर को भी कछुए भेंट किए थे। भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक और सांस्कृतिक संबंधों के संदर्भ में इन उपहारों को एक सकारात्मक संकेत माना जाता है।
यह घटनाक्रम जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और सेशेल्स के द्विपक्षीय संबंधों को प्रदर्शित करता है, वहीं दूसरी ओर घरेलू राजनीति में पुरानी उपलब्धियों और क्रेडिट को लेकर बहस का नया केंद्र बन गया है। जहां प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की जैव विविधता और दोनों देशों के संबंधों के प्रतीक के रूप में इस पल को साझा किया, वहीं विपक्ष ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को याद दिलाते हुए इस पर अपना पक्ष रखा है। यह राजनीतिक संवाद देश में चल रही उस प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान की गतिविधियों पर भी अब विस्तार से चर्चा और प्रतिक्रियाएं दी जा रही हैं। यह यात्रा न केवल राजनयिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही, बल्कि इसने भारत की घरेलू राजनीतिक चर्चाओं में भी एक विशेष स्थान प्राप्त किया है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
