ईरान संकट के बीच PM मोदी की तीसरी CCS मीटिंग ; क्या बैठक में बड़ा रोडमैप हुआ तैयार?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान संघर्ष से उत्पन्न वैश्विक तनाव के बीच तीसरी उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार मार्गों, तेल आपूर्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा हुई। सरकार ने रणनीतिक तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया।

नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक
नई दिल्ली में वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के हफ्तों में तीसरी बार एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े संघर्ष और उसके व्यापक प्रभावों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को लेकर बढ़ती चिंताओं के मद्देनज़र आयोजित की गई।
सूत्रों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण बैठक में देश की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें रक्षा, खुफिया और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक में विशेष रूप से उन संभावित जोखिमों की समीक्षा की गई जो ईरान–इज़राइल–अमेरिका तनाव के कारण भारत की अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ सकते हैं।
चर्चा का एक प्रमुख केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ रहा, जिसे वैश्विक तेल आपूर्ति का अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं पर पड़ सकता है। इसी संदर्भ में बैठक में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैकल्पिक आपूर्ति रणनीतियों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
सरकारी स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि भारत लगातार कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) और अन्य सुरक्षा समीक्षाओं के माध्यम से स्थिति पर निगरानी बनाए हुए है। यह प्रक्रिया पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बाद से निरंतर चल रही है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी प्रकार की वैश्विक अस्थिरता का प्रभाव भारत की आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक ढांचे पर न्यूनतम हो।
सरकार की प्राथमिकताओं में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखना, तेल, उर्वरक और बिजली की कीमतों में संभावित उछाल को रोकना तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित रखना शामिल है। इसी के साथ कूटनीतिक स्तर पर भी भारत ने पश्चिम एशियाई देशों के साथ संवाद बढ़ाया है ताकि क्षेत्रीय तनाव का प्रभाव भारत पर न पड़े।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ईरान संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, जिससे कई देशों की आपूर्ति श्रृंखलाएं दबाव में हैं। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा निर्भरता को विविध स्रोतों में विभाजित करने और लॉजिस्टिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय रणनीति अपना रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक को भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत देश वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार तैयारियों को तेज कर रहा है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
