संसद का 'यूनिवर्सिटी' अवतार: 59 सांसदों की विदाई पर पीएम मोदी का प्रेरक संबोधन, शायरी सुनकर सांसदों ने थपथपाई मेज
राज्यसभा में 59 सांसदों की विदाई के भावुक क्षण। पीएम मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे की मांग पर पढ़ी बेजोड़ शायरी और इमरान प्रतापगढ़ी का लिया नाम। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
PM Modi's inspiring farewell address to 59 MPs
नई दिल्ली:
भारतीय लोकतंत्र के ऊपरी सदन, राज्यसभा में आज का दिन बेहद भावुक और यादगार रहा। अप्रैल से जुलाई के बीच सेवानिवृत्त हो रहे 59 सांसदों को विदाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल उनके योगदान की सराहना की, बल्कि सदन के भीतर हल्के-फुल्के अंदाज में एक नई ऊर्जा भी भर दी। इस दौरान पक्ष-विपक्ष के बीच एक दुर्लभ और मधुर संवाद देखने को मिला, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है।
'राजनीति में फुल स्टॉप नहीं होता'
अपने विदाई भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने जाने वाले सांसदों का मनोबल बढ़ाते हुए एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति केवल सदन से हो रही है, सार्वजनिक जीवन से नहीं। पीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "राजनीति में 'फुल स्टॉप' जैसी कोई चीज नहीं होती। भविष्य आपका इंतजार कर रहा है और आपका अनुभव हमेशा हमारे राष्ट्रीय जीवन का स्थायी हिस्सा रहेगा।" उन्होंने सांसदों को आश्वस्त किया कि भले ही कुछ सदस्य दोबारा सदन में न आएं, लेकिन उनका योगदान देश के विकास की नींव में हमेशा दर्ज रहेगा।
खरगे की डिमांड और पीएम की शायरी
सदन में उस वक्त तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी जब पीएम मोदी ने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की एक पुरानी शिकायत या यूं कहें कि 'अपेक्षा' को पूरा किया। दरअसल, खरगे ने अपने भाषण के दौरान चुटकी लेते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी पहले अपने भाषणों में खूब शेरो-शायरी करते थे, लेकिन आजकल उन्होंने इसे बंद कर दिया है।
इस पर जवाब देते हुए पीएम मोदी ने मुस्कुराकर कहा, "खरगे जी ने अपने विदाई भाषण में एक अपेक्षा रख दी है, तो मेरा भी दायित्व बनता है कि उसे पूरा करूं।" पीएम ने आगे मजाकिया अंदाज में कहा कि वह शायरी की दुनिया के व्यक्ति नहीं हैं, यह काम तो इमरान प्रतापगढ़ी का है। इसके बाद उन्होंने शानदार अंदाज में ये पंक्तियाँ पढ़ीं:
"कर्म ऐसा करो, अमन में जहां से गुजरे तुम्हारी नजरें, उधर से तुम्हें सलाम आए।"
जैसे ही प्रधानमंत्री ने यह शेर पूरा किया, सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ओर के सांसदों ने अपनी मेज थपथपाकर इस अंदाज का स्वागत किया।
अनुभवी स्तंभों की सराहना
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में तीन वरिष्ठ नेताओं – पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, मल्लिकार्जुन खरगे और शरद पवार की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने इन नेताओं को भारतीय संसदीय कार्यप्रणाली का 'स्तंभ' बताया। पीएम ने कहा कि इन दिग्गजों ने अपने जीवन का आधे से अधिक समय संसद को दिया है, जो नई पीढ़ी के नेताओं के लिए किसी पाठशाला से कम नहीं है।
संसद: एक खुला विश्वविद्यालय
सदन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने राज्यसभा को एक "खुला विश्वविद्यालय" (Open University) करार दिया। उन्होंने कहा कि यहाँ सांसदों को केवल औपचारिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जीवन की जटिलताओं को समझने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलता है। उनके अनुसार, "सदन में प्राप्त अनुभव वास्तव में व्यापक और मूल्यवान हैं।"
राज्यसभा की निरंतरता और महत्व
प्रधानमंत्री ने उपराष्ट्रपति और सभापति जगदीप धनखड़ की मौजूदगी में कहा कि राज्यसभा की कार्यप्रणाली अद्भुत है। हर दो साल में एक-तिहाई सदस्यों का सेवानिवृत्त होना इस सदन की निरंतरता सुनिश्चित करता है। यह प्रक्रिया पुराने अनुभवों को सहेजने और नए विचारों (नए सदस्यों) को शामिल करने का एक बेहतरीन संतुलन है।
प्रमुख बिंदु: एक नजर में (Fact Box)
विवरण | जानकारी |
कुल सेवानिवृत्त सांसद | 59 सदस्य |
अवधि | अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच |
विशेष उल्लेख | एच डी देवेगौड़ा, मल्लिकार्जुन खरगे, शरद पवार |
पीएम का मुख्य संदेश | राजनीति में अनुभव का कोई अंत नहीं होता |
हास्य-व्यंग्य | इमरान प्रतापगढ़ी और खरगे के साथ संवाद |
आज की विदाई सभा ने यह साबित कर दिया कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद, भारतीय संसद में सौहार्द और सम्मान की परंपरा जीवित है। प्रधानमंत्री का संबोधन उन सांसदों के लिए एक नई शुरुआत की प्रेरणा लेकर आया, जो आज इस 'विश्वविद्यालय' से स्नातक होकर जनसेवा के अगले पड़ाव पर जा रहे हैं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
