Parliament Budget Session : संसद में ऐसा क्या हुआ जो स्पीकर Om Birla ने Narendra Modi को आने से किया मना ? जाने विस्तार से
Parliament Budget Session : लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कल हुए हंगामे को 'काला धब्बा' बताते हुए बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा को खतरा था और विपक्षी सांसद उनकी कुर्सी तक पहुंच गए थे, जिसके कारण पीएम को सदन में न आने की सलाह दी गई। बजट सत्र के दौरान पीएम मोदी के भाषण टलने और सुरक्षा चूक के दावों की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Parliament Budget Session : भारतीय संसदीय इतिहास में बुधवार का दिन एक ऐसी घटना का गवाह बना जिसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 'काला धब्बा' करार दिया है। गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर ने जो खुलासे किए, उसने देश के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। ओम बिरला के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर उत्पन्न हुए गंभीर खतरे के कारण उन्हें सदन में प्रवेश न करने की सलाह देनी पड़ी थी।
सुरक्षा का संकट: जब पीएम की कुर्सी तक जा पहुंचा हंगामा
लोकसभा अध्यक्ष ने अत्यंत गंभीर लहजे में बताया कि बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष का व्यवहार मर्यादाओं को लांघ गया था।
- घेराबंदी की साजिश: स्पीकर ने दावा किया कि उन्हें पुख्ता जानकारी मिली थी कि विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री के पास पहुंचकर किसी भी अप्रत्याशित या निंदनीय घटना को अंजाम दे सकते हैं।
- अभूतपूर्व हस्तक्षेप: ओम बिरला ने कहा, "मैंने प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत रूप से आग्रह किया कि सुरक्षा और गरिमा को देखते हुए वे सदन में न आएं।" यह संभवतः पहली बार है जब सुरक्षा चिंताओं के कारण प्रधानमंत्री को अपने निर्धारित संबोधन से पीछे हटना पड़ा।
- सांसदों का आचरण: सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्षी महिला सांसद वेल में घुसकर प्रधानमंत्री की खाली कुर्सी की ओर बढ़ी थीं, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई।
मनोज तिवारी का चश्मदीद बयान : 'वेल में बेकाबू हुआ विपक्ष'
बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए बताया कि सदन की मर्यादा तार-तार हो गई थी। वरिष्ठ मंत्रियों के बार-बार समझाने के बावजूद, विपक्ष की महिला सांसद प्रधानमंत्री की सीट की ओर लगातार बढ़ रही थीं। इसी हंगामे के चलते बुधवार शाम को स्पीकर संध्या राय को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और पीएम का भाषण टल गया।
संवैधानिक मर्यादा और सभापति का स्थान :
ओम बिरला ने जोर देकर कहा कि संविधान ने सदन के सभापति और प्रधानमंत्री के पद को एक गरिमामयी स्थान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत हमले या शारीरिक अवरोध के स्तर तक ले जाना पूरी तरह से असंवैधानिक है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
