महिला आरक्षण पर पप्पू यादव के बिगड़े बोल ; बिहार महिला आयोग ने उठाए कड़े कदम, जानें पूरा मामला
पप्पू यादव के महिलाओं पर दिए गए विवादित बयान ने देशभर में राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया। महिला आरक्षण बहस के बीच दिए गए इस बयान पर बिहार राज्य महिला आयोग ने नोटिस जारी किया, जबकि विभिन्न दलों के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव
भारतीय राजनीति के मौजूदा परिदृश्य में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने महिलाओं की राजनीति में भागीदारी को लेकर एक बेहद विवादास्पद टिप्पणी कर दी। उनके बयान ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी, बल्कि देशभर में महिलाओं की गरिमा, प्रतिनिधित्व और सामाजिक सोच को लेकर तीखी बहस भी छेड़ दी।
यह विवाद उस समय सामने आया जब पप्पू यादव महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि “90 प्रतिशत महिलाएं बिना किसी पुरुष नेता के कमरे में जाए राजनीति में प्रवेश नहीं कर सकतीं।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है, लेकिन वास्तविकता में उन्हें सम्मान नहीं मिलता। अपने बयान में उन्होंने समाज और व्यवस्था को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए यह आरोप लगाया कि घरेलू हिंसा से लेकर शोषण तक, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में राजनेताओं की भूमिका भी गंभीर है।
#WATCH | Purnea, Bihar: Independent MP Pappu Yadav says, "...In India, women are called goddesses, but they will never be respected here. System and society are responsible for this...90% of women cannot do politics without entering the room of politicians..."
— ANI (@ANI) April 21, 2026
(20.04.2026) pic.twitter.com/WyHY4ZitUJ
यादव के इस बयान को व्यापक स्तर पर आपत्तिजनक और अपमानजनक माना गया। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी महिलाओं की उपलब्धियों और उनकी स्वतंत्र पहचान को कमजोर करती है, साथ ही समाज में पहले से मौजूद लैंगिक पूर्वाग्रहों को और गहरा करती है। कई राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों ने इसे महिलाओं के प्रति असंवेदनशील और रूढ़िवादी सोच का प्रतीक बताया।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद में महिला आरक्षण को लेकर बहस तेज है। हाल ही में लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को परिसीमन के मुद्दे पर असहमति के चलते पारित नहीं किया जा सका, जिससे यह विषय पहले से ही संवेदनशील बना हुआ था। ऐसे माहौल में यादव की टिप्पणी ने बहस को और अधिक तीखा कर दिया।
Taking a suo motu cognisance, Bihar State Women's Commission issues a notice to Independent MP Pappu Yadav over his statement on women. The Commission has sought his response within 3 days, asking why he made the statement and why his Lok Sabha membership should not be cancelled. https://t.co/AhuA9P87yg pic.twitter.com/7qA0c8w1PZ
— ANI (@ANI) April 21, 2026
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पप्पू यादव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने उनसे उनके बयान पर स्पष्टीकरण मांगा है और संभावित कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। यह कदम इस बात का संकेत है कि इस तरह के बयानों को लेकर संस्थागत स्तर पर भी सख्त रुख अपनाया जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस बयान को “सस्ता, पिछड़ा और महिला विरोधी सोच” करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यादव किन महिलाओं के संदर्भ में ऐसी बात कर रहे हैं और कहा कि यदि यह स्पष्ट नहीं किया गया तो यह पूरे महिला समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी मानी जाएगी। वहीं शिवसेना (यूबीटी) की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे “शर्मनाक, घृणित और गंदी टिप्पणी” बताते हुए कहा कि इस तरह की सोच महिलाओं के खिलाफ चरित्र हनन और सामाजिक दबाव को बढ़ावा देती है।
#WATCH | Delhi | On Independent MP Pappu Yadav's statement, BJP National Spokesperson Shehzad Poonawalla says, “Pappu Yadav is considered the closest leader to the Congress party and extremely close to Rahul Gandhi. Although he is an independent leader, his importance in Rahul's… https://t.co/AhuA9P87yg pic.twitter.com/pwGU7cRBrU
— ANI (@ANI) April 21, 2026
Shameless, disgusting and a filthy comment from Lok Sabha MP Pappu Yadav. It is this sick mindset that gives wings to thousands of people who continue to judge women in politics and use slander & character assassination as a tool to silence them. pic.twitter.com/xoOCKrfpt6
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) April 22, 2026
विवाद बढ़ने के बाद पप्पू यादव ने अपनी सफाई में कहा कि उनका उद्देश्य महिलाओं का अपमान करना नहीं था, बल्कि राजनीति में मौजूद शोषण को उजागर करना था। हालांकि, उनकी यह सफाई अब तक उठे आक्रोश को शांत करने में सफल नहीं हो सकी है और मामला लगातार चर्चा और आलोचना का विषय बना हुआ है।
यह घटना केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय राजनीति और समाज में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण, भाषा और जवाबदेही को लेकर गहरे सवाल खड़े करती है। ऐसे समय में जब महिला सशक्तिकरण और समान प्रतिनिधित्व की दिशा में प्रयास जारी हैं, इस तरह के विवाद यह संकेत देते हैं कि सामाजिक मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता अभी भी व्यापक रूप से बनी हुई है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
