ईरान के साथ रिश्तों की नई इबारत- खामनेई के अंतिम संस्कार पर ओवैसी की बड़ी अपील, पीएम मोदी को ईरान जाना चाहिए|
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ईरान के दिवंगत नेता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अपील की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (दाएं) का फाइल फोटो।
एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अपील की है। ओवैसी ने कहा कि यदि ईरान सरकार की ओर से औपचारिक निमंत्रण मिलता है, तो प्रधानमंत्री को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के अंतिम संस्कार में स्वयं शामिल होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि भारत के लिए केवल एक प्रतिनिधिमंडल भेजना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत रूप से वहां जाना भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और ईरान के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का एक शक्तिशाली वैश्विक संदेश देगा।
ओवैसी ने हैदराबाद में अपने बयान में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई अवसरों पर भारत का समर्थन किया है। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री की उपस्थिति दोनों देशों के बीच पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों के प्रति सम्मान और कूटनीतिक मजबूती का प्रतीक होगी। ओवैसी के अनुसार, भारत को वैश्विक मंच पर यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से निर्धारित करने में सक्षम है और किसी भी बाहरी भू-राजनीतिक दबाव या वैश्विक प्रभाव के आगे झुकने वाला देश नहीं है।
अपने संबोधन में उन्होंने केंद्र सरकार की पिछली विदेश नीतिगत निर्णयों पर भी सवाल उठाए। ओवैसी ने इजरायल-ईरान संघर्ष से पूर्व प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा और इजरायल के समर्थन में दिए गए बयानों का जिक्र करते हुए उन्हें अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी प्रकार के दबाव से ऊपर उठकर अपने राष्ट्रीय हितों और स्वतंत्र कूटनीतिक रुख के आधार पर ही निर्णय लेने चाहिए। ओवैसी ने दोहराया कि ईरान के साथ भारत के रिश्ते गहरे हैं और इस समय प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत भागीदारी इन रिश्तों को एक नई ऊंचाई और स्थिरता प्रदान कर सकती है।
यह अपील ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर कई देश अपनी विदेश नीति की प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार कर रहे हैं। हालांकि, ओवैसी की इस मांग पर केंद्र सरकार या विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आमतौर पर, ऐसे उच्च-स्तरीय राजनयिक दौरों का निर्णय सुरक्षा प्रोटोकॉल, प्रोटोकॉल अधिकारियों की सलाह और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर लिया जाता है। प्रधानमंत्री की उपस्थिति सुनिश्चित करना न केवल एक कूटनीतिक शिष्टाचार होगा, बल्कि यह पश्चिम एशिया के साथ भारत की निरंतर जुड़ाव नीति की दिशा को भी तय करेगा। यह स्पष्ट है कि इस मांग ने एक बार फिर भारत की विदेश नीति के स्वतंत्र चरित्र और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के प्रबंधन पर चर्चा छेड़ दी है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
