संविधान की दुहाई या सियासत? वंदे मातरम् पर ओवैसी के तीखे बोल, बीजेपी ने याद दिलाया 'जिन्ना' वाला दौर!
एआईएमआईएम प्रमुख ने राष्ट्रगीत को जन गण मन के समान वैधानिक दर्जा देने के केंद्र के फैसले को संविधान की प्रस्तावना के विरुद्ध बताया।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रगीत के वैधानिक दर्जे पर आपत्ति जता रहे हैं।
भारतीय राजनीति के फलक पर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के सम्मान को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार के उस हालिया प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है, जिसमें 'वंदे मातरम्' को 'जन गण मन' के समान वैधानिक और दंडात्मक सुरक्षा देने की बात कही गई है। ओवैसी ने इस मुद्दे पर न केवल संवैधानिक तर्क दिए हैं, बल्कि राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी की विचारधारा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन पर तीखा पलटवार करते हुए उनकी तुलना मोहम्मद अली जिन्ना की विचारधारा से कर दी है।
असदुद्दीन ओवैसी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए स्पष्ट किया कि भारत के संविधान की प्रस्तावना 'हम भारत के लोग' से शुरू होती है, 'भारत मां' से नहीं। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय संविधान अनुच्छेद 1 के तहत 'इंडिया, जो कि भारत है' को राज्यों का एक संघ बताता है। ओवैसी के अनुसार, भारत किसी देवी या देवता का देश नहीं है और इसे किसी एक धार्मिक प्रतीक या देवता के नाम पर नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि संविधान सभा के दौरान भी कुछ सदस्यों ने प्रस्तावना की शुरुआत देवी या देवता के नाम से करने की कोशिश की थी, लेकिन तब उन संशोधनों को खारिज कर दिया गया था।
ओवैसी ने राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी पर हमला बोलते हुए उन्हें 'मुस्लिम विरोधी' करार दिया। उन्होंने दावा किया कि चटर्जी की सहानुभूति ब्रिटिश राज के प्रति थी और उनके मन में मुसलमानों के लिए नफरत थी। ओवैसी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे दिग्गजों ने भी इसे पूर्ण रूप से स्वीकार करने के बजाय इस पर विचार किया था। ओवैसी का मुख्य तर्क यह है कि 'वंदे मातरम्' एक देवी को समर्पित गीत है, जबकि 'जन गण मन' भारत और उसके लोगों का गुणगान करता है, इसलिए दोनों को समान वैधानिक दर्जा नहीं दिया जा सकता।
इस बयान पर तेलंगाना बीजेपी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन रामचंद्र राव ने ओवैसी के विरोध को 'धार्मिक अलगाववाद' की राजनीति करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवैसी बिल्कुल उसी पैटर्न पर चल रहे हैं जिस पर कभी जिन्ना चलते थे। बीजेपी नेता के अनुसार, जिन्ना ने भी अपने राजनीतिक करियर के उत्तरार्ध में इसी तरह सांस्कृतिक प्रतीकों का विरोध शुरू किया था। उन्होंने कहा कि जब राजनीति विशेष धार्मिक पहचान पर निर्भर हो जाती है, तो सभ्यता और राष्ट्रीय एकता के प्रतीकों को खतरा बताया जाने लगता है। बीजेपी ने ओवैसी को घेरते हुए कहा कि वे हमेशा समान नागरिक संहिता और तीन तलाक जैसे सुधारों का विरोध करते रहे हैं।
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद केंद्र सरकार के उस फैसले के बाद शुरू हुआ है जिसमें 'वंदे मातरम्' को बाधित करने या उसका अपमान करने को 'जन गण मन' की तरह ही दंडनीय अपराध की श्रेणी में लाने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य राष्ट्रगीत को वही कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है जो वर्तमान में राष्ट्रगान को प्राप्त है। इस कानूनी प्रावधान का उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों की गरिमा को सुरक्षित करना है। हालांकि, ओवैसी के कड़े रुख ने इस कानूनी प्रक्रिया को एक नए राजनीतिक और वैचारिक संघर्ष में बदल दिया है, जिससे आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक गरमागरम बहस होने के संकेत मिल रहे हैं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
