90% मुसलमान तो वोट ही नहीं दे सकते थे..." विभाजन पर ओवैसी का वो बयान जिसने सियासी गलियारों में लगाई आग!
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मौलाना आजाद की किताब का हवाला देते हुए कहा कि बंटवारे के लिए आम मुसलमान नहीं बल्कि तत्कालीन नेतृत्व जिम्मेदार था।

गुजरात के सूरत में एक जनसभा को संबोधित करते हुए एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, जहां उन्होंने भारत के विभाजन और मुस्लिम नेतृत्व पर अपने विचार रखे।
भारत विभाजन के लिए जिन्ना और कांग्रेस जिम्मेदार: असदुद्दीन ओवैसी का ऐतिहासिक दावों के साथ बड़ा हमला
नई दिल्ली: भारत के राजनीतिक परिदृश्य में विभाजन एक ऐसा विषय है जो दशकों बाद भी चर्चाओं और विवादों के केंद्र में रहता है। हाल ही में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसी संवेदनशील मुद्दे पर एक ऐसा बयान दिया है जिसने देश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। गुजरात के सूरत स्थित लिंबायत में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने स्पष्ट रूप से दावा किया कि 1947 में हुए भारत के बंटवारे के लिए आम मुसलमान जिम्मेदार नहीं था। उन्होंने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए विभाजन की पूरी जिम्मेदारी मोहम्मद अली जिन्ना और उस समय की कांग्रेस नेतृत्व पर डाल दी है।
ओवैसी का तर्क उनके इस दावे पर आधारित है कि स्वतंत्रता पूर्व भारत में मतदान के अधिकार अत्यंत सीमित थे। उन्होंने सभा में जोर देकर कहा कि उस दौर में लगभग 90 प्रतिशत मुसलमानों के पास वोट डालने का अधिकार ही नहीं था, ऐसे में उन पर विभाजन का दोष मढ़ना ऐतिहासिक रूप से गलत और निराधार है। उनके अनुसार, यह विभाजन उन नेताओं के निर्णयों का परिणाम था जिनके हाथ में सत्ता की बागडोर थी। ओवैसी ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि क्या मुल्क के दो टुकड़े करने में कांग्रेस पार्टी शामिल नहीं थी? उन्होंने स्वयं ही इसका उत्तर देते हुए कहा कि कांग्रेस की सहमति के बिना यह विभाजन संभव नहीं था।
अपने दावों को पुख्ता करने के लिए एआईएमआईएम प्रमुख ने देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की प्रसिद्ध पुस्तक 'इंडिया विंस फ्रीडम' का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मौलाना आजाद ने अपनी किताब में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि उन्होंने महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू से बार-बार विभाजन को रोकने की अपील की थी। ओवैसी के अनुसार, आजाद ने इन नेताओं से आग्रह किया था कि वे भारत के टुकड़े न होने दें, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने उनकी चेतावनियों और अपीलों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। ओवैसी ने जनता से आह्वान किया कि वे इस किताब को पढ़ें ताकि वे जान सकें कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए इतिहास का सही ज्ञान होना कितना आवश्यक है।
विभाजन के इतिहास से परे, ओवैसी ने वर्तमान राजनीति पर भी कड़े प्रहार किए। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की राजनीति और वहां उन्हें 'बीजेपी की बी-टीम' कहे जाने पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि जब वह चुनाव लड़ते हैं, तो उन पर भाजपा को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया जाता है। ओवैसी ने आंकड़ों का खेल समझाते हुए कहा कि बंगाल में टीएमसी और कांग्रेस सैकड़ों सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि उनकी पार्टी महज 11 सीटों पर है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि विपक्षी दल उन 11 सीटों को भूलकर बाकी की 270 सीटों पर भाजपा को हराकर दिखाएं।
ओवैसी ने ममता बनर्जी और टीएमसी सरकार पर मुस्लिम बहुल इलाकों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव के लिए सीधे तौर पर ममता बनर्जी जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम क्षेत्रों में न तो अच्छे स्कूल हैं और न ही अस्पताल। जहां अस्पताल हैं, वहां बुनियादी सुविधाएं जैसे बेड और डॉक्टर नदारद हैं। ओवैसी ने कहा कि इन क्षेत्रों में साफ पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है, जो यह दर्शाता है कि तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों ने इस समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है और उन्हें कभी स्वतंत्र नेतृत्व विकसित नहीं करने दिया। उनके इस भाषण ने न केवल ऐतिहासिक तथ्यों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले विपक्षी एकता और क्षेत्रीय राजनीति के समीकरणों को भी गरमा दिया है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
