बिहार की राजनीति में एक बार फिर वह क्षण आ गया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पिछले कई दिनों से चल रही राजनीतिक उठापटक, कयासों और बैठकों के दौर के बाद अब अनिश्चितता के बादल पूरी तरह छंट चुके हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके साथ ही बिहार में करीब डेढ़ साल पुराने 'महागठबंधन' सरकार का अंत हो गया है। नीतीश कुमार का यह कदम राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू करने वाला है, क्योंकि वह अब एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के साथ मिलकर सरकार बनाने जा रहे हैं।

आज सुबह पटना में मुख्यमंत्री आवास पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायक दल की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में नीतीश कुमार ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और गठबंधन के भीतर आ रही चुनौतियों पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में मौजूद सभी विधायकों ने नीतीश कुमार के फैसले का एकमत से समर्थन किया। कैबिनेट की संक्षिप्त बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने आधिकारिक तौर पर कैबिनेट भंग करने और इस्तीफा देने के एजेंडे पर मुहर लगाई। कैबिनेट के सदस्य इस क्षण भावुक नजर आए, लेकिन राज्य के व्यापक हितों का हवाला देते हुए इस फैसले को अंतिम रूप दिया गया।

इस्तीफा सौंपने के बाद राजभवन के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह निर्णय वर्तमान गठबंधन में काम करने में आ रही दिक्कतों के कारण लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और संकेत दिए कि आगामी सरकार में उनका मुख्य लक्ष्य बिहार का समग्र विकास और शासन में स्थिरता लाना होगा। नीतीश कुमार ने कहा कि वह राज्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और नई सरकार में बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास करेंगे।

पटना का राजनीतिक तापमान इस समय अपने चरम पर है। राजभवन और लोकभवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी कर दी गई है। बीजेपी और जेडीयू के शीर्ष नेताओं के बीच बैठकों का सिलसिला लगातार जारी है। नई सरकार के गठन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है, जिसमें मंत्रिमंडल के स्वरूप और उपमुख्यमंत्री के नामों पर भी सहमति बनने की चर्चा है। प्रशासनिक स्तर पर भी शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आज देर शाम या कल सुबह तक नई मंत्रिपरिषद का शपथ ग्रहण हो सकता है।

बिहार के पिछले दो दशकों के इतिहास को देखें तो नीतीश कुमार हमेशा सत्ता के केंद्र बिंदु रहे हैं। उनके इस ताजा कदम ने जहां उनके विरोधियों को हमलावर होने का मौका दिया है, वहीं उनके समर्थकों का मानना है कि यह निर्णय बिहार की जनता की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है। बिहार में 'पलटूराम' जैसे कटाक्षों के बीच नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह परिस्थितियों के अनुसार अपनी राजनीतिक राह बदलने में माहिर हैं। इस सत्ता परिवर्तन का सीधा असर आगामी लोकसभा चुनावों पर भी पड़ना तय है, जहां एनडीए गठबंधन अब बिहार में अधिक मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story