काठमांडू: पड़ोसी देश नेपाल की राजनीति और कूटनीतिक गलियारों में इस समय एक अभूतपूर्व हलचल देखी जा रही है। बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने दशकों से चली आ रही राजदूतों की नियुक्ति प्रक्रिया को पूरी तरह से बदलने का निर्णय लिया है। नेपाल के इतिहास में यह पहली बार होगा जब राजदूत जैसे महत्वपूर्ण पदों को भरने के लिए सरकार औपचारिक रिक्तियां (वैकेंसी) घोषित करेगी और खुली प्रतियोगिता के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

नेपाल के विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि राजदूतों के रिक्त पदों को भरने के लिए जल्द ही विज्ञापन जारी किए जाएंगे। वर्तमान में नेपाल के कूटनीतिक मिशनों में भारत, चीन, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे महत्वपूर्ण देशों सहित कुल 17 राजदूत पद खाली होने वाले हैं। सरकार की इस पहल का उद्देश्य राजदूतों के चयन में पारदर्शिता लाना और राजनीतिक भाई-भतीजावाद को समाप्त करना है।

नेपाल में राजदूतों की नियुक्ति के मौजूदा नियमों के अनुसार, कुल पदों का पचास प्रतिशत हिस्सा 'करियर डिप्लोमैट्स' यानी विदेश मंत्रालय के अनुभवी अधिकारियों से भरा जाता है। शेष पचास प्रतिशत पद राजनीतिक कोटे के तहत भरे जाने का प्रावधान है। बालेन शाह सरकार इसी राजनीतिक कोटे के तहत होने वाली नियुक्तियों को अब खुली प्रतियोगिता और विशेषज्ञों की तलाश के माध्यम से भरना चाहती है। रिक्तियों के विज्ञापन में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता, आयु, शोध पत्र, अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अनुभव और उनके द्वारा किए गए शोध कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही सरकार ने 'भारत कनेक्शन' को भी नई धार दी है। विदेश मंत्री ने यह अनिवार्य कर दिया है कि भविष्य में विदेश सचिव बनने के लिए अधिकारियों को भारत और चीन जैसे सामरिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी देशों में सेवा देना आवश्यक होगा। यह निर्णय दर्शाता है कि नेपाल अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को कितनी प्राथमिकता दे रहा है और वहां तैनात होने वाले अधिकारियों से उच्चतम स्तर की विशेषज्ञता की अपेक्षा रखता है।

हालांकि, सरकार के इस कदम पर विवाद और आपत्तियों के स्वर भी उठने लगे हैं। नेपाल के कई पूर्व राजदूतों और वरिष्ठ राजनयिकों ने इस प्रक्रिया की व्यवहारिकता पर सवाल उठाए हैं। एक सेवानिवृत्त राजनयिक के अनुसार, खुली प्रतियोगिता के माध्यम से राजदूत चुनना राज्य के प्रति निष्ठा और प्रतिबद्धता जैसे मानदंडों से समझौता हो सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि खुली प्रतियोगिता के बजाय सरकार को 'हेड हंटिंग' यानी संबंधित क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को सीधे ढूंढकर उन्हें नियुक्त करना चाहिए।

नेपाल की इस नई कूटनीतिक प्रयोगशाला के परिणाम आने वाले समय में स्पष्ट होंगे। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो यह दक्षिण एशिया में कूटनीतिक नियुक्तियों के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित कर सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें काठमांडू से निकलने वाले उस विज्ञापन पर टिकी हैं, जो नेपाल की भविष्य की विदेश नीति और उसके वैश्विक प्रतिनिधित्व की नई इबारत लिखेगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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