NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कथित आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजा देने, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की मांग की है। जंतर-मंतर पर बड़े विरोध प्रदर्शन की भी घोषणा की गई है।

देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर जारी विवाद अब केवल पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। इस मुद्दे ने अब एक गंभीर मानवीय और सामाजिक आयाम भी ग्रहण कर लिया है। इसी बीच युवा आंदोलन के रूप में उभरे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने उन NEET अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग की है, जिनकी मौत कथित तौर पर परीक्षा विवाद, मानसिक तनाव और पुनर्परीक्षा की अनिश्चितताओं के बीच आत्महत्या के रूप में हुई।

CJP के प्रमुख अभिजीत दिपके ने 19 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इस पत्र में उन्होंने उन परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है, जिन्होंने अपने बच्चों को NEET परीक्षा की तैयारी के दौरान खो दिया। साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की है और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

दिपके का आरोप है कि NEET-UG 2026 से जुड़े कथित पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने की आशंकाओं, पुनर्परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव ने कई छात्रों को गहरे तनाव में धकेल दिया। उनका कहना है कि लाखों परिवारों ने अपने बच्चों की मेडिकल शिक्षा के सपने को पूरा करने के लिए कोचिंग, यात्रा और अन्य तैयारियों पर भारी खर्च किया है। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवालों ने छात्रों और अभिभावकों दोनों को मानसिक और आर्थिक संकट में डाल दिया है।



CJP का दावा है कि इन परिस्थितियों के कारण जिन छात्रों ने अपनी जान गंवाई, उनके परिवारों को केवल भावनात्मक ही नहीं बल्कि आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ी है। इसी आधार पर संगठन ने प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹1 करोड़ का मुआवजा देने की मांग की है।

इस पूरे अभियान को गति देने वाली घटनाओं में NEET अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी का मामला प्रमुख माना जा रहा है। हाल ही में अभिजीत दिपके ने उनके परिवार से मुलाकात की और सार्वजनिक रूप से उनके परिवार को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अन्य छात्रों की मौतें भी परीक्षा विवाद और उससे उत्पन्न मानसिक तनाव से जुड़ी पाई जाती हैं, तो उनके परिवारों को भी समान मुआवजा मिलना चाहिए।

मुआवजे की मांग के अलावा CJP ने परीक्षा प्रणाली में कई संरचनात्मक सुधारों का प्रस्ताव भी रखा है। संगठन का कहना है कि देश की प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र ऑडिट व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। साथ ही पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाए और परीक्षा रद्द होने या प्रभावित होने की स्थिति में छात्रों को उचित राहत और मुआवजा प्रदान किया जाए।

इसी क्रम में CJP ने 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन ने इसे छात्रों और नौकरी अभ्यर्थियों के लिए “फाइनल कॉल” बताया है। प्रस्तावित प्रदर्शन में NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने, छात्र आत्महत्याओं के मुद्दे, परीक्षा अनियमितताओं, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी तथा प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने जैसी मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान के रूप में हुई थी, लेकिन समय के साथ यह युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय एक बड़े आंदोलन के रूप में सामने आई है। संगठन ने विशेष रूप से परीक्षा घोटालों, पेपर लीक मामलों, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और सरकारी जवाबदेही जैसे विषयों पर व्यापक जनसमर्थन हासिल किया है। हाल के महीनों में इसके विरोध प्रदर्शनों और अभियानों ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी है।

हालांकि, 19 जून 2026 तक प्रधानमंत्री कार्यालय या शिक्षा मंत्रालय की ओर से CJP की मांगों को लेकर कोई आधिकारिक स्वीकृति या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। केंद्र सरकार ने अभी तक उन परिवारों के लिए किसी विशेष मुआवजा पैकेज की घोषणा भी नहीं की है, जिनकी मौतों को आंदोलनकारी समूह NEET विवाद से जोड़ रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ₹1 करोड़ मुआवजे की यह मांग केवल परीक्षा अनियमितताओं की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस मानवीय कीमत पर भी सवाल उठाती है जो परीक्षा व्यवस्था की विफलताओं के कारण चुकानी पड़ सकती है। यदि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक तथा सामाजिक समर्थन प्राप्त करता है, तो शिक्षा सुधारों, परीक्षा प्रबंधन और छात्र कल्याण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ सकती है। ऐसे में यह मामला केवल एक परीक्षा विवाद नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और छात्रों के भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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