एनडीए बैठक में पीएम मोदी संग झालमुड़ी पर चिराग की नजदीकियां व कुशवाहा की दूरी ने गरमाई बिहार की सियासत।
भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहयोगियों संग खाया भूंजा, चिराग पासवान की बढ़ी नजदीकियां तो उपेंद्र कुशवाहा की दूरी ने बढ़ाई बिहार में सियासी हलचल।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एनडीए बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहयोगी दलों के नेताओं के साथ अनौपचारिक माहौल में झालमुड़ी का आनंद लेते हुए|
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की उच्च स्तरीय बैठक के दौरान एक ऐसा वाक्या सामने आया जिसने देश विशेषकर बिहार के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। केंद्र में एनडीए सरकार के ऐतिहासिक सफर के महत्वपूर्ण पड़ाव पर आयोजित इस बैठक में वैसे तो कई नीतिगत फैसले लिए जा रहे थे, लेकिन सत्र के अंतराल में हुआ एक अनौपचारिक वाकया सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के ब्रेक के दौरान उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख सहयोगी दल के नेताओं के साथ अनौपचारिक अंदाज में 'झालमुड़ी' (भूंजा) का लुत्फ उठाया। इस हल्के-फुल्के पल का वीडियो जैसे ही प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया, राजनीतिक विश्लेषकों ने नेताओं की शारीरिक भाषा और उनकी 'पोजीशनिंग' का सूक्ष्म विश्लेषण करना शुरू कर दिया, जो बिहार की हालिया आंतरिक सियासी खींचतान की ओर साफ इशारा कर रहा है।
इस अनौपचारिक बैठक के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ठीक बगल में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान खड़े नजर आए। चिराग पासवान बेहद आत्मीय और सहज अंदाज में प्रधानमंत्री से बातचीत करते हुए झालमुड़ी का स्वाद ले रहे थे, जो गठबंधन के भीतर उनकी मजबूत स्थिति और शीर्ष नेतृत्व से उनकी घनिष्ठता को प्रदर्शित करता है। इसके विपरीत, इसी समूह का हिस्सा होने के बावजूद राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा थोड़े फासले पर, समूह के एक कोने में पीछे की तरफ खड़े होकर भूंजा खाते दिखे। सार्वजनिक मंच पर नेताओं की इस तरह की तस्वीरें और दूरियां कभी भी संयोग मात्र नहीं मानी जातीं, यही वजह है कि चिराग की प्रधानमंत्री से अत्यधिक निकटता और कुशवाहा की यह कूटनीतिक दूरी इस समय सत्ता के गलियारों में सबसे बड़ा हॉट टॉपिक बन चुकी है।
प्रधानमंत्री मोदी के इस खास 'झालमुड़ी ग्रुप' में बिहार एनडीए के अन्य दिग्गज चेहरे भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी भी प्रधानमंत्री के करीब खड़े होकर इस अनौपचारिक संवाद का हिस्सा बने। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सहयोगी दलों के नेता भी इस ग्रुप में खास तौर पर सक्रिय दिखे, जिनमें निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर शामिल थे। ये सभी नेता प्रधानमंत्री से बेहद आत्मीयता से झालमुड़ी लेते दिखाई दिए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन भी प्रधानमंत्री के इर्द-गिर्द मुस्तैद रहकर गठबंधन की जमीनी एकजुटता और आपसी समन्वय का संदेश देने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि, इन सबके बीच सभी की नजरें बिहार के दो बड़े क्षेत्रीय क्षत्रपों की पोजीशनिंग पर ही टिकी रहीं।
राजनीतिक पंडितों द्वारा उपेंद्र कुशवाहा की इस दृश्यमान दूरी को बिहार के हालिया और बेहद संवेदनशील राजनीतिक घटनाक्रमों से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, वर्तमान में कुशवाहा खेमे के भीतर गहरी नाराजगी और असंतोष की खबरें छन-छन कर बाहर आ रही हैं। इस असंतोष की मुख्य वजह बिहार विधान परिषद (MLC) के आगामी चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को एनडीए द्वारा उम्मीदवार न बनाया जाना है। इस फैसले ने कुशवाहा कैंप को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है, क्योंकि दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार की सम्राट चौधरी सरकार में पंचायती राज मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
इस पूरे मामले का एक गंभीर वैधानिक और संवैधानिक पहलू भी है, जो दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को मंत्री पद पर बने रहने के लिए छह महीने के भीतर राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य होना अनिवार्य होता है। चूंकि दीपक प्रकाश इस समय दोनों में से किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं और एनडीए ने उन्हें एमएलसी का टिकट भी नहीं दिया, इसलिए अब उनके मंत्री पद पर सीधा कानूनी संकट खड़ा हो गया है। माना जा रहा है कि टिकट बंटवारे में अपने बेटे की उपेक्षा से आहत उपेंद्र कुशवाहा की यही आंतरिक टीस और नाराजगी दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री के 'झालमुड़ी ग्रुप' के दौरान एक कोने में अलग-थलग खड़े रहने के रूप में सतह पर आ गई, जो आगामी दिनों में बिहार एनडीए के भीतर एक बड़े सियासी घमासान का रूप ले सकती है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
