एनसीपी विधायकों की बैठक: सुनेत्रा पवार के सामने फंड और अनदेखी पर फूटा गुस्सा
महाराष्ट्र में सत्ता में रहने के बावजूद विधायकों ने पर्याप्त विकास फंड न मिलने और 2029 चुनाव में हार की आशंका जताते हुए नाराजगी जताई।

मुंबई में एनसीपी विधायकों की बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार संबोधन करती हुईं।
मुंबई। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की ओर से देवगिरि बंगले पर बुलाई गई विधायकों की बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के भीतर क्षेत्रीय विकास कार्यों और सरकारी फंड को लेकर असंतोष खुलकर सामने आया। विधायकों ने एक स्वर में शिकायत की कि सत्ता में होने के बावजूद उनके निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल रहा है। कुछ विधायकों ने यहां तक चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही तो 2024 में जितने मतों से जीत हासिल की थी, 2029 के विधानसभा चुनाव में उतने ही वोटों से हार का सामना करना पड़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, विधायकों ने बैठक में कहा कि उनकी पार्टी सरकार का हिस्सा है, इसके बावजूद सरकार से उनके क्षेत्रों में कोई काम नहीं हो पा रहा है। कुछ विधायकों ने दूसरे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी एनसीपी विधायकों के काम नहीं कराने का आरोप लगाया। इस दौरान नासिक जिले की एक महिला विधायक ने नासिक कुंभ मेले की तैयारियों और उससे जुड़े विकास कार्यों में एनसीपी की अनदेखी किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने शिकायत की कि कुंभ मेले के लिए बड़ी संख्या में काम चल रहे हैं, लेकिन बीजेपी के मंत्री और नेता एनसीपी को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। किसी भी काम के संबंध में एनसीपी से न तो कोई चर्चा की जा रही है और न ही उसे किसी कार्य में शामिल किया जा रहा है।
नासिक के एक अन्य विधायक ने भी फंड की कमी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि यही स्थिति जारी रही तो अगले चुनाव में उन्हें उतने ही वोटों से हार मिल सकती है, जितने मतों से उन्होंने पिछला चुनाव जीता था।
अटकलों के बीच उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने मंगलवार देर रात विधायकों की बैठक बुलाई थी। एनसीपी सूत्रों के अनुसार, बैठक की शुरुआत में ही सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट कर दिया था कि इसमें किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी विधायक केवल अपनी शिकायतें और सुझाव रखें। इसके बाद विधायकों ने एक-एक करके अपनी समस्याएं और नाराजगी उनके सामने रखी।
बैठक में सतारा के एक विधायक ने बीजेपी पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि जिला परिषद चुनाव के दौरान उन्हें किस तरह परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी वजह से बाद में उन्होंने शिवसेना के साथ मिलकर जिला बैंक का चुनाव लड़ा। बैठक के बाद एनसीपी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे ने भी स्वीकार किया था कि विधायकों ने फंड नहीं मिलने की शिकायत उठाई है।
बैठक में संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद बढ़ाने के लिए पार्टी कार्यालय में दोबारा जनता दरबार शुरू करने का फैसला किया गया। इसके तहत विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के साथ हर सप्ताह बैठक आयोजित की जाएगी। पार्टी के सभी नेताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए नियमित संवाद पर भी सहमति बनी। इसके अलावा विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता देने और फंड की उपलब्धता का मुद्दा अन्य मंत्रियों के साथ मंत्रिमंडल की बैठक में उठाने की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार लेंगी।
बैठक में संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर भी निर्णय लिए गए। जीशान सिद्दीकी मुंबई अध्यक्ष और उमेश पाटील मुख्य प्रवक्ता बने रहेंगे। पार्थ पवार ने दोनों पदाधिकारियों के अगले छह महीने के कामकाज पर नजर रखने की बात कही। उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि भविष्य में पार्टी के बड़े फैसले कोर कमेटी से चर्चा करने के बाद ही लिए जाएंगे।
देर रात तक चली विधायकों की बैठक के बाद बुधवार सुबह सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में एनसीपी की कोर कमेटी की बैठक भी हुई। लगातार दो बैठकों के आयोजनको लेकर महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि, एनसीपी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता उमेश पटेल ने पार्टी में किसी तरह के विवाद से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी में कोई विवाद नहीं है और वरिष्ठ नेताओं तथा युवा नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय बना हुआ है।
विधायकों की नाराजगी, विकास कार्यों के लिए फंड की मांग और संगठनात्मक फैसलों के बीच सुनेत्रा पवार की इन बैठकों को एनसीपी के भीतर तालमेल और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के समाधान के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau
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