नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिला सशक्तिकरण के नए युग का आगाज़ और जन-समर्थन का महाभियान

नई दिल्ली: भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में महिलाओं की भागीदारी को एक नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से राजधानी के विज्ञान भवन में 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' का भव्य आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन ने देश की 'आधी आबादी' को नीति-निर्माण की मुख्यधारा में लाने का संकल्प दोहराया। इस कार्यक्रम में देशभर से आई महिला प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जहाँ प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल एक चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्र के सर्वांगीण विकास का अनिवार्य आधार है। यह सम्मेलन उस युगांतकारी परिवर्तन की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जो भारत की बेटियों को 'लाभार्थी' की श्रेणी से ऊपर उठाकर 'निर्णायक' की भूमिका में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करता है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि संसद में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत की नारी शक्ति के दशकों पुराने संघर्ष और साधना की लोकतांत्रिक सिद्धि है। मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक विधेयक के प्रति अपना अटूट समर्थन जताते हुए देश की महिलाओं से एक विशेष अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने जन-भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए आधिकारिक मिस्ड कॉल नंबर 9667173333 जारी किया और अपील की कि अधिक से अधिक लोग इस पर मिस्ड कॉल देकर इस कानून के प्रति अपना समर्थन दर्ज कराएं। रेखा गुप्ता ने अपने भाषण का अंत प्रेरक पंक्तियों से किया, जिसमें उन्होंने समय के सांचे को बदलने वाले नेतृत्व को रेखांकित किया।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी इस अधिनियम को युगांतकारी बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि यह कानून महिलाओं के सामर्थ्य और आत्म-सम्मान को सुनिश्चित करने वाला एक महापर्व है। सम्मेलन के दौरान भारत में महिलाओं की स्थिति के क्रमिक विकास पर भी गहन चर्चा हुई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि भारत की बेटियों ने कन्या भ्रूण हत्या, सती प्रथा, बाल विवाह और अशिक्षा जैसी कुरीतियों के विरुद्ध एक लंबी और कठिन यात्रा तय की है। उन्होंने कहा कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के सफल अभियान के बाद अब देश प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 'बेटी बढ़ाओ' के आधुनिक युग में प्रवेश कर चुका है, जहाँ अवसर और अधिकार दोनों समान रूप से उपलब्ध हैं।

कानूनी और संवैधानिक पक्ष की बात करें तो नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे 128वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया गया था, अब 106वें कानून के रूप में अस्तित्व में है। यह ऐतिहासिक कानून लोकसभा और देश की सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत यानी एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। वर्ष 2023 में पारित इस अधिनियम का मुख्य लक्ष्य राजनीति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना है। सरकार की योजना के अनुसार, इसे वर्ष 2029 के आम चुनावों से पहले प्रभावी रूप से लागू करने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। यह आरक्षण प्रारंभिक तौर पर 15 वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगा, जिसे भविष्य में आगे बढ़ाया जा सकता है।

सम्मेलन का समापन एक मजबूत सकारात्मक संदेश के साथ हुआ कि नारी शक्ति के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है। यह अधिनियम न केवल विधायी निकायों में महिलाओं की संख्या बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य की नीतियों में उनके दृष्टिकोण को भी मजबूती प्रदान करेगा। जन-समर्थन के लिए शुरू किया गया मिस्ड कॉल अभियान इस बात का प्रमाण है कि सरकार इस परिवर्तन को केवल सरकारी फाइलों तक सीमित न रखकर एक जन-आंदोलन बनाना चाहती है। विज्ञान भवन से उठी यह आवाज देश के हर कोने तक पहुँच रही है, जो भारत के लोकतांत्रिक भविष्य को और अधिक समावेशी और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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