मुंबई में सड़कों पर नमाज़ अदा करने को लेकर नया विवाद सामने आया है। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने मुंबई पुलिस और बीएमसी को पत्र लिखकर सार्वजनिक सड़कों पर नमाज़ पर रोक लगाने की मांग की है। वहीं टीएमसी नेता मजीद मेमन ने कहा कि सड़कों पर नमाज़ समाधान नहीं है, लेकिन मस्जिदों में जगह की कमी भी एक बड़ी चुनौती है।

मुंबई में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ अदा करने को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने मुंबई पुलिस आयुक्त और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त को पत्र लिखकर शहर की सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ अदा किए जाने पर रोक लगाने की मांग की है। इस मुद्दे ने न केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

अपने पत्र में किरीट सोमैया ने दावा किया कि मुंबई के कई इलाकों में सड़कों, फुटपाथों और कुछ रेलवे स्टेशनों के बाहर नमाज़ अदा की जाती है, जिससे आम नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है और पैदल चलने वालों को भी परेशानी होती है, विशेष रूप से व्यस्त समय के दौरान। सोमैया ने प्रशासन से आग्रह किया कि नमाज़ केवल मस्जिदों, ईदगाहों या प्रशासन द्वारा निर्धारित अधिकृत स्थानों पर ही अदा की जाए और सार्वजनिक सड़कों का उपयोग धार्मिक गतिविधियों के लिए न होने दिया जाए।



सोमैया का कहना है कि सार्वजनिक स्थान सभी नागरिकों के लिए होते हैं और उनका उपयोग इस प्रकार होना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति के दैनिक जीवन या आवागमन में बाधा न आए। उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की कि ऐसे स्थानों की निगरानी की जाए जहां नियमित रूप से सड़कों पर नमाज़ अदा की जाती है और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने अधिकृत धार्मिक स्थलों पर वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की भी बात कही।

यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र में सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। हाल के महीनों में किरीट सोमैया ने बकरीद के दौरान आवासीय सोसाइटियों में पशु बलि, सरकारी परिसरों में धार्मिक गतिविधियों और सार्वजनिक नियमों के पालन जैसे कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। इसी क्रम में उन्होंने अब सड़कों पर नमाज़ के मुद्दे को प्रशासन के समक्ष रखा है।

हालांकि, इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता मजीद मेमन ने अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को सड़कों पर नमाज़ अदा नहीं करनी चाहिए यदि उससे अन्य लोगों को असुविधा होती है, और स्वयं मुस्लिम समुदाय के कई लोगों ने भी इस बात का समर्थन किया है। मेमन ने कहा कि समस्या की जड़ यह है कि मुस्लिम आबादी लगातार बढ़ रही है, जबकि कई क्षेत्रों में मस्जिदों की संख्या और क्षमता पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, नई मस्जिदों की स्थापना की अनुमति आसानी से नहीं मिलती, जिसके कारण विशेष अवसरों या भीड़भाड़ वाले समय में लोगों को खुले स्थानों का सहारा लेना पड़ता है।



मजीद मेमन ने यह भी स्पष्ट किया कि नमाज़ दिन में पांच बार नियमित रूप से मस्जिदों के भीतर ही अदा की जाती है और इस विषय का समाधान आपसी संवाद और सौहार्द के माध्यम से निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के कई नेता भी सड़कों पर नमाज़ अदा किए जाने के पक्ष में नहीं हैं। साथ ही उन्होंने किरीट सोमैया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वे मुसलमानों को नमाज़ अदा करने देना चाहते हैं या नहीं। मेमन ने इसे मुस्लिम समुदाय और प्रशासन के बीच का विषय बताते हुए कहा कि इस मामले को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए।

फिलहाल, मुंबई पुलिस और बृहन्मुंबई महानगरपालिका की ओर से किरीट सोमैया के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन ने अभी तक यह संकेत नहीं दिया है कि इस मांग पर कोई विशेष कार्रवाई की जाएगी या नहीं। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर उस संवेदनशील प्रश्न को सामने ला दिया है जिसमें एक ओर नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है, तो दूसरी ओर सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात और आम लोगों की सुविधा का मुद्दा। समर्थकों का तर्क है कि किसी भी धर्म, राजनीतिक संगठन या सामाजिक समूह को सार्वजनिक सड़कों का उपयोग इस तरह नहीं करना चाहिए जिससे जनजीवन प्रभावित हो, जबकि आलोचकों का मानना है कि ऐसे मामलों का समाधान संतुलित और संवेदनशील तरीके से किया जाना चाहिए। आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख इस बहस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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