आठ वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद मुंबई की सियासी तस्वीर एक बार फिर करवट लेती दिख रही है। 16 जनवरी को शुरू हुई मतगणना के शुरुआती रुझानों ने यह साफ कर दिया है कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव केवल एक स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया, बल्कि यह महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला निर्णायक मोड़ बनता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन फिलहाल बढ़त बनाए हुए है और सत्ता संतुलन में ऐतिहासिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

राज्य की 29 नगर निगमों में हुए चुनावों की मतगणना एक साथ शुरू हुई, जिनमें बीएमसी के 227 वार्ड शामिल हैं। बीएमसी चुनाव कानूनी विवादों और कोविड-19 महामारी के कारण लगभग आठ वर्षों तक टलते रहे थे। इस लंबे अंतराल के बाद हुए चुनावों को राज्य की सबसे अहम स्थानीय राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, महायुति गठबंधन 80 से अधिक वार्डों में आगे चल रहा है। इनमें से अकेले भारतीय जनता पार्टी लगभग 43 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना करीब 17 वार्डों में आगे है। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना 55 से 58 वार्डों में बढ़त बनाए हुए दिखाई दे रही है।

राज्यव्यापी रुझानों पर नजर डालें तो तस्वीर और भी स्पष्ट हो जाती है। अब तक गिने गए करीब 1,100 वार्डों में से 500 से अधिक पर भाजपा की बढ़त दर्ज की गई है। यह आंकड़ा न केवल पार्टी की संगठनात्मक मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि शहरी मतदाता एक नए राजनीतिक विकल्प की ओर झुक रहा है। यदि मौजूदा रुझान नतीजों में तब्दील होते हैं, तो बीएमसी के इतिहास में पहली बार भाजपा का महापौर बनने की संभावना प्रबल मानी जा रही है।

मुंबई के साथ-साथ पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ क्षेत्र में भी राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम में भाजपा की बढ़त ने 25 वर्षों से चली आ रही राजनीतिक परंपरा को तोड़ दिया है। ताजा रुझानों के अनुसार, पुणे में भाजपा 48 वार्डों में आगे है। खास बात यह है कि कई ऐसे वार्ड, जहां पहले शिवसेना का दबदबा रहा, वहां इस बार भाजपा ने निर्णायक बढ़त बनाई है। यह बदलाव शहरी मतदाताओं के मुद्दा-आधारित और विकास-केंद्रित रुख को दर्शाता है।

चुनाव प्रक्रिया के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों का पालन किया गया। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और मतगणना केंद्रों पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए। अधिकारियों के अनुसार, अंतिम नतीजे आने में अभी समय लगेगा, लेकिन रुझानों ने राजनीतिक दलों की रणनीतियों और समीकरणों को पहले ही प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

बीएमसी और अन्य नगर निगमों के ये चुनाव केवल स्थानीय शासन तक सीमित नहीं हैं। इन्हें 2029 में होने वाले विधानसभा और भविष्य के बड़े राजनीतिक संघर्षों की भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है। मौजूदा रुझान यह संकेत देते हैं कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां सत्ता का केंद्र और राजनीतिक प्राथमिकताएं दोनों बदलती नजर आ रही हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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