Mumbai BMC Elections 2026: थिनर से साफ हो रहा है बीएमसी चुनाव का 'मार्कर', मतदाताओं ने उठाए लापरवाही पर सवाल
बीएमसी चुनाव 2026 में अमिट स्याही की जगह मार्कर पेन के इस्तेमाल ने मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आसानी से मिटने वाले निशान, मतदाता सूची में गड़बड़ी और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर उठी चिंताओं ने चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर नई बहस छेड़ दी है।

बीएमसी एलेक्शंस 2026
मुंबई में हुए 2026 के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव इस बार केवल राजनीतिक मुकाबले के कारण नहीं, बल्कि मतदान प्रक्रिया में अपनाई गई एक असामान्य व्यवस्था को लेकर भी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। आमतौर पर मतदान के बाद मतदाताओं की उंगली पर लगाई जाने वाली अमिट स्याही की जगह इस बार कई मतदान केंद्रों पर मार्कर पेन का इस्तेमाल देखा गया। यह बदलाव, जो पहली नज़र में प्रशासनिक सुविधा का हिस्सा लगता है, अब एक बड़े विवाद का कारण बन चुका है।
चुनाव के दिन बड़ी संख्या में मतदाताओं ने शिकायत की कि उनकी उंगली पर लगाया गया निशान आसानी से मिट जा रहा है। सैनिटाइज़र, पानी या सामान्य रसायनों के संपर्क में आते ही यह निशान हल्का पड़ गया या पूरी तरह साफ हो गया, जबकि पारंपरिक अमिट स्याही का उद्देश्य ही यह होता है कि वह कई दिनों तक बनी रहे और दोबारा मतदान की संभावना को खत्म करे। सोशल मीडिया से लेकर मतदान केंद्रों के बाहर तक, इस मुद्दे पर चर्चा तेज़ होती चली गई।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, ये मार्कर पेन राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए थे और इनका उपयोग किसी एक बूथ या क्षेत्र तक सीमित नहीं था। प्रशासन का कहना है कि महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों में पहले भी इस तरह के विकल्पों का प्रयोग किया जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, बोतल में आने वाली अमिट स्याही की तुलना में मार्कर को संभालना आसान होता है, यह जल्दी सूखता है और अधिक भीड़ वाले मतदान केंद्रों पर प्रक्रिया को तेज़ बनाता है।
हालांकि, व्यावहारिक सुविधा का यह तर्क मतदाताओं और विपक्षी दलों को संतुष्ट नहीं कर पाया। उनकी मुख्य चिंता यह है कि यदि उंगली का निशान आसानी से हटाया जा सकता है, तो मतदान की मूल सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। उंगली पर निशान लगाने की पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना होता है कि कोई भी व्यक्ति दोबारा मतदान न कर सके। इस व्यवस्था पर सवाल उठने से चुनाव की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।
Ink-marks being made on Voter’s fingers by using ‘marker pens’ instead of Govt manufactured indelible ink, is easily wearing off by the simple use of ‘Nail Polish Remover’ as I demonstrate, in this video.
— Ruben Mascarenhas (@rubenmasc) January 15, 2026
Totally Unacceptable. Elections are being reduced to a farce.… pic.twitter.com/io5nEfUMHx
चुनाव के दौरान अन्य अव्यवस्थाओं की शिकायतें भी सामने आईं। कुछ मतदाताओं ने बताया कि ऑनलाइन उपलब्ध मतदाता सूची में दर्ज जानकारी मतदान केंद्रों पर मौजूद रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही थी। एक मतदाता ने निराशा जताते हुए कहा कि इंटरनेट पर मिले बूथ नंबर और केंद्र पर दी गई जानकारी में अंतर होने के कारण उन्हें बिना मतदान किए लौटना पड़ा। ऐसी घटनाओं ने प्रशासनिक तैयारियों और समन्वय पर भी सवाल खड़े किए हैं।
निर्वाचन अधिकारियों ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेने और जांच का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि मतदान प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और यदि कहीं कोई तकनीकी या प्रशासनिक चूक हुई है, तो उसे भविष्य में सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
बीएमसी चुनाव 2026 का यह विवाद केवल एक तकनीकी बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के भरोसे से भी जुड़ा हुआ है। जब मतदाता मतदान केंद्र तक पहुंचकर भी असमंजस, अव्यवस्था या संदेह का सामना करते हैं, तो इसका असर लोकतंत्र की जड़ों पर पड़ता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और विश्वास को मजबूत करने के लिए प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
