मध्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरी खबर सामने आई है जिसने प्रदेश के लाखों गेहूं उत्पादक किसानों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निरंतर प्रयासों और केंद्र सरकार के साथ सक्रिय संवाद के परिणामस्वरूप, केंद्र ने मध्य प्रदेश के लिए गेहूं खरीदी के निर्धारित लक्ष्य में 22 लाख मीट्रिक टन की भारी वृद्धि को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद अब राज्य में कुल गेहूं उपार्जन का लक्ष्य बढ़कर लगभग 100 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है जो प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती प्रदान करेगा।

रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए शुरुआती दौर में भारत सरकार द्वारा मध्य प्रदेश के लिए 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि, इस वर्ष अनुकूल मौसम और किसानों की कड़ी मेहनत के चलते प्रदेश में गेहूं की पैदावार ने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस साल उत्पादन लगभग दोगुना हुआ है जिसके कारण शुरुआती कोटा अपर्याप्त साबित हो रहा था। किसानों की चिंताओं को समझते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ निरंतर संपर्क में थे ताकि उपार्जन की सीमा को बढ़ाया जा सके।

इस प्रशासनिक सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रदेश की पुकार को सुना है। अतिरिक्त कोटे की मंजूरी मिलने से अब उन किसानों को सीधा लाभ होगा जिनकी फसल बंपर उत्पादन के कारण केंद्रों पर पहुंचने के इंतजार में थी। सरकार ने न केवल खरीदी का लक्ष्य बढ़ाया है बल्कि मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वस्त किया है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो उपार्जन की अंतिम तिथि को भी आगे बढ़ाया जाएगा। यह कदम उन चुनौतियों के बीच उठाया गया है जहां वर्तमान में वैश्विक स्तर पर निर्यात की बाधाएं और जूट के बोरों की उपलब्धता जैसे संकट भी मौजूद हैं।

कानूनी और आधिकारिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि समर्थन मूल्य पर होने वाली यह खरीदी पारदर्शी तरीके से जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती भावांतर भुगतान योजना का उदाहरण देते हुए किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर परिस्थिति में उनके आर्थिक हितों की रक्षा के लिए तत्पर है। पिछले वर्ष के गेहूं भंडारण की चुनौतियों के बावजूद, नई खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए जिला प्रशासन और खाद्य विभाग को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं ताकि किसी भी किसान को अपनी उपज बेचने में असुविधा न हो।

इस ऐतिहासिक निर्णय का प्रभाव न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा बल्कि यह ग्रामीण बाजार में तरलता को भी बढ़ावा देगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह 'किसान-हितैषी' रुख यह संदेश देता है कि राज्य सरकार अन्नदाताओं की मेहनत का एक-एक दाना उचित मूल्य पर खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। बंपर पैदावार के इस दौर में केंद्र और राज्य का यह समन्वय मध्य प्रदेश को देश के 'गेहूं बास्केट' के रूप में पुनः स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक मील का पत्थर साबित होगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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