न सांसद, न विधायक फिर इतनी सुरक्षा क्यों? मोहन भागवत की Z+ सिक्योरिटी पर RJD के इन तीखे सवालों से मचा सियासी हड़कंप
बिहार में सुरक्षा राजनीति को लेकर जारी विवाद के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की Z+ सुरक्षा व्यवस्था पर बिहार दौरे के दौरान आरजेडी ने प्रशासनिक मानकों के तहत सवाल उठाए।
पटना: बिहार की सियासत में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर छिड़ा घमासान अब एक बड़े राष्ट्रीय विवाद में तब्दील हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत को केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की गई सर्वोच्च 'जेड-प्लस' (Z+) श्रेणी की सुरक्षा और एडवांस्ड सिक्योरिटी लाइजन (ASL) प्रोटोकॉल को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। यह राजनीतिक विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब आरएसएस प्रमुख अपने संगठन के शताब्दी वर्ष के अवसर पर बिहार के मुंगेर प्रवास के लिए पटना पहुंचे हैं। राजद ने इस सुरक्षा व्यवस्था की तुलना देश के केंद्रीय गृह मंत्री की सुरक्षा से करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
इस पूरे विवाद को हवा तब मिली जब राजद की राष्ट्रीय प्रवक्ता कंचन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक आधिकारिक बयान जारी कर मोहन भागवत की सुरक्षा व्यवस्था के औचित्य पर सवालिया निशान लगाया। राजद प्रवक्ता ने पूछा कि जो व्यक्ति कभी किसी संवैधानिक पद पर नहीं रहा, उसे देश की सबसे सुरक्षित और वीआईपी सुरक्षा श्रेणियों में से एक क्यों दी गई है। उन्होंने तर्क दिया कि मोहन भागवत न तो कभी देश के सांसद रहे हैं, न ही किसी राज्य के विधायक रहे हैं, और न ही उनके पास कोई प्रशासनिक या संवैधानिक जिम्मेदारी है। वह केवल एक संगठन के प्रमुख हैं, जिसे खुद प्रधानमंत्री ने एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) के रूप में परिभाषित किया था। राजद ने पूछा कि दुनिया के किस गैर-सरकारी संगठन के प्रमुख को केंद्रीय मंत्रियों के समकक्ष स्तर की सुरक्षा और एएसएल प्रोटोकॉल का अधिकार मिलता है।
राजद का यह तीखा हमला दरअसल बिहार सरकार द्वारा हाल ही में लालू प्रसाद यादव के परिवार की सुरक्षा में की गई भारी कटौती की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। बिहार सरकार की उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा समिति की बैठक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री व विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था को काफी कम कर दिया गया था। इसके अलावा तेज प्रताप यादव के पास अब केवल एक अंगरक्षक बचा है और राजद सांसद मीसा भारती की सुरक्षा में भी कटौती कर केवल दो सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। हालांकि सरकार ने उपमुख्यमंत्री रहे तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था को यथावत रखा है। इस कटौती के विरोध में लालू यादव और राबड़ी देवी ने अपनी बची हुई पूरी सरकारी सुरक्षा को वापस लौटाते हुए विरोध दर्ज कराया था।
प्रशासनिक और कानूनी नियमों का हवाला देते हुए राजद प्रवक्ता कंचन यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित सरकार पर विपक्षी नेताओं की जानबूझकर उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दो-दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा को कम करके भाजपा सरकार राजनीतिक द्वेष के चलते लालू जी और राबड़ी जी की जान को सीधे तौर पर खतरे में डाल रही है। दूसरी तरफ, बिना किसी संवैधानिक दर्जे वाले व्यक्ति को देश की सर्वोत्तम सुरक्षा देना पूरी तरह से राजनीतिक पक्षपात को दर्शाता है। सुरक्षा मानकों और इंटेलिजेंस इनपुट की इस राजनीतिक समीक्षा ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल ला दिया है, जिसके आने वाले समय में विधानसभा और अन्य विधायी सत्रों के दौरान भी गूंजने की पूरी संभावना है।

Lalita Rajput
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