प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, और इस बार पंजाब की हिस्सेदारी बढ़ने की प्रबल संभावनाएं जताई जा रही हैं। जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और गृह मंत्री के साथ प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई हालिया मुलाकात ने इन अटकलों को और अधिक बल दिया है। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, राजनीतिक विश्लेषक इसे बीजेपी की एक बड़ी रणनीति के रूप में देख रहे हैं, जहां पार्टी राज्य में अपनी सक्रियता को और अधिक विस्तार देने का प्रयास कर रही है।

आंकड़ों की दृष्टि से देखा जाए तो 2014 के बाद से केंद्र सरकार में पंजाब का प्रतिनिधित्व काफी सीमित रहा है। पहले शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री थीं, जिन्होंने 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद बीजेपी के सोम प्रकाश 2019 से 2024 तक मंत्री रहे। वर्तमान में, पंजाब से एकमात्र केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू हैं। हालांकि, अब कयास लगाए जा रहे हैं कि पंजाब को केंद्रीय मंत्रिमंडल में दो से तीन मंत्री पद मिल सकते हैं, जिससे राज्य के साथ-साथ बीजेपी की राजनीतिक पैठ भी मजबूत होगी।

सियासी गलियारों में पंजाब के उन नेताओं के नामों पर चर्चा तेज है जो आम आदमी पार्टी (AAP) से बीजेपी में शामिल हुए हैं। इस दौड़ में सेलिब्रिटी फेस माने जाने वाले राघव चड्ढा का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जबकि लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के अशोक मित्तल भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए किसी बड़े चेहरे को कैबिनेट में जगह दे सकती है। इसके साथ ही, बीजेपी पंजाब में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए तरुण चुघ को भी सक्रिय भूमिका में ला सकती है, जो मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में एक अनुभवी नेता के रूप में जाने जाते हैं।

पंजाब की सियासी तासीर को देखते हुए बीजेपी का यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य विधानसभा में 117 सीटें हैं, जिनमें बीजेपी के पास दो विधायक हैं। वहीं, 13 लोकसभा सीटों में बीजेपी का वर्तमान में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जबकि राज्यसभा की सात सीटों में से छह पर बीजेपी का कब्जा है। यह फेरबदल केवल मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं, बल्कि पंजाब के आगामी चुनावों के लिए बीजेपी की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जो राज्य में पार्टी के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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