महाराष्ट्र विधानसभा का शीतकालीन सत्र 10 दिसंबर 2025 को एक अनोखी और ध्यान खींचने वाली घटना का साक्षी बना, जब शिवसेना के विधायक शरद सोनवने ने तेंदुए का भड़काऊ पोशाक पहनकर सदन में प्रवेश किया। यह दृश्य न केवल सदन में उपस्थित सभी lawmakers के लिए आश्चर्य का कारण बना, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक गंभीर चेतावनी भी बनकर उभरा कि ग्रामीण महाराष्ट्र में मानव–वन्यजीव संघर्ष एक विकराल समस्या बन चुका है।

घटना की पृष्ठभूमि बताते हुए, जुन्नर के विधायक शरद सोनवने ने बताया कि यह कदम उन्होंने विशेष रूप से मानव–तेंदुआ संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर सरकार और जनता का ध्यान आकर्षित करने के लिए उठाया है। उन्होंने सदन में प्रवेश करते ही कहा कि उनके पीछे की यह “तेंदुआ पोशाक” ग्रामीण इलाकों में बढ़ते तेंदुए के हमलों और इससे उत्पन्न भय को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाती है। सोनवने के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में तेंदुए के हमलों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ गई है, जिससे ग्रामीणों की सुरक्षा और जीवन जोखिम में पड़ गया है।

विधायक सोनवने ने सदन में अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि वह इस असामान्य क़दम के जरिए सरकार को यह संदेश देना चाहते हैं कि यह सिर्फ़ एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक गंभीर समस्या की तरफ़ संकेत है। उन्होंने दावा किया कि जुन्नर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दर्जनों मौतें और कई घायल होने के मामले सामने आए हैं, जिनमें तेंदुए के हमलों का प्रत्यक्ष हाथ रहा है। 

सोनवने ने सरकार से कड़ी और त्वरित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने “मानव–तेंदुआ संघर्ष” के मद्देनज़र राज्य में आपातकाल घोषित करने की माँग करते हुए यह सुझाव भी दिया कि सरकार विशेष प्राणी नियंत्रण और बचाव केंद्रों का निर्माण करे, जहाँ आवश्यकतानुसार वन्यजीवों को सुरक्षित रूप से पकड़ा और रखा जा सके। उनका मानना है कि इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी और वन्यजीव संरक्षण के उद्देश्य भी संतुलित रूप से पूरे होंगे।



इस दौरान विधानसभा में मौजूद विपक्ष और अन्य सदस्य भी टिप्पणी से नहीं बच सके। कुछ सदस्यों ने सोनवने के इस तरीक़े को असामान्य और नाटकीय बताया, तो कुछ ने कहा कि इस प्रकार का प्रदर्शन मुद्दे की गंभीरता को उजागर करता है। हालांकि विधानसभा की आचार संहिता और सदन के शिष्टाचार को लेकर भी बहस हुई, जिसमें यह कहा गया कि इस तरह की पोशाक सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं थी। लेकिन अधिकांश सदस्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि मानव–वन्यजीव संघर्ष एक सत्य और गंभीर समस्या है, जिसका समाधान जल्द से जल्द सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए।

आधिकारिक पक्ष से भी इस बारे में प्रतिक्रिया आई है। वन विभाग सूत्रों ने कहा कि तेंदुए और अन्य वन्यजीवों के मानव-आश्रित क्षेत्रों में प्रवेश के कारणों का अध्ययन जारी है और समाधान के लिए विविध रणनीतियाँ तैयार की जा रही हैं, जिनमें स्थानीय समुदायों के सहयोग से राहत और बचाव कार्य, वन्यजीव गलियारों का संरक्षण और मानसून पूर्व जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं।

समापन में यह कहा जा सकता है कि शरद सोनवने का यह असामान्य प्रदर्शन केवल एक सुर्ख़ी वाला प्रदर्शन नहीं रहा; बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक समस्या की पहचान और राहत के लिए एक ज़ोरदार आह्वान बनकर उभरा है। मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए यह मुद्दा आने वाले दिनों में और भी अधिक गूँजता दिखाई देगा।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story