मिनेसोटा की विधायिका में सत्ता का संतुलन बदलने की संभावना के बीच आगामी चुनाव निर्णायक साबित हो सकते हैं। 23 अक्टूबर 2026 को प्रसारित एमपीआर न्यूज के ‘पॉलिटिक्स फ्राइडे’ कार्यक्रम में इस बात पर चर्चा की गई कि क्या चुनाव राज्य की विधायिका में लंबे समय से बने कड़े राजनीतिक मुकाबले को खत्म कर पाएंगे।

मिनेसोटा हाउस और मिनेसोटा सीनेट का नियंत्रण तय करने के लिए कुल 201 अलग-अलग सीटों पर मुकाबले होने हैं। पिछले चुनावों में राज्य की विधायिका में दोनों दलों के बीच बेहद कम अंतर देखने को मिला। एक समय ऐसा भी रहा, जब दोनों सदनों में राजनीतिक दलों की संख्या बराबर हो गई थी। मौजूदा चुनाव से पहले सीनेट में डेमोक्रेटिक-फार्मर-लेबर (DFL) पार्टी को केवल एक सीट की बढ़त हासिल थी, जबकि हाउस में दोनों दलों के बीच बराबरी की स्थिति बनी हुई थी।

इस बार चुनाव का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि राज्य को नया गवर्नर मिलने वाला है। विधायिका के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने वाले दल को सरकारी खर्च, करों और कई अन्य नीतिगत मुद्दों पर एजेंडा तय करने की शक्ति मिलेगी। ऐसे में चुनाव परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा और नीतिगत प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकते हैं।

एमपीआर न्यूज के राजनीति संपादक ब्रायन बकस्ट ने शुक्रवार दोपहर 12 बजे प्रसारित कार्यक्रम में दोनों राजनीतिक दलों के कॉकस नेताओं के साथ चुनावी अभियान और सदनों में नियंत्रण हासिल करने की कोशिशों पर चर्चा की। कार्यक्रम में इस बात पर भी ध्यान दिया गया कि दोनों दल चुनावी नतीजों को अपने पक्ष में करने के लिए किस तरह प्रयास कर रहे हैं।

गवर्नर और अमेरिकी सीनेट के चुनावों में उम्मीदवारों के बीच बहस का दौर समाप्त होने के बाद कार्यक्रम में एमपीआर न्यूज के राजनीतिक संवाददाताओं से भी चुनावी मुकाबले के अंतिम चरण की स्थिति पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में सेंट पॉल से सीनेटर एरिन मर्फी, जो DFL की सीनेट बहुमत नेता हैं, और ईस्ट ग्रैंड फोर्क्स से सीनेटर मार्क जॉनसन, जो रिपब्लिकन सीनेट अल्पमत नेता हैं, शामिल हुए। इसके अलावा रैमसे से प्रतिनिधि हैरी निस्का, जो मिनेसोटा हाउस में रिपब्लिकन कॉकस नेता हैं, तथा कून रैपिड्स से प्रतिनिधि जैक स्टीफेंसन, जो हाउस में DFL कॉकस नेता हैं, ने हिस्सा लिया।

एमपीआर न्यूज की राजनीतिक संवाददाता डाना फर्ग्यूसन और वरिष्ठ राजनीति रिपोर्टर पीटर कॉक्स भी चर्चा में शामिल रहे।

मिनेसोटा में दोनों सदनों के बीच लंबे समय से बने करीबी राजनीतिक मुकाबले के कारण आगामी चुनाव केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं हैं। इनके परिणाम यह तय करेंगे कि नई सरकार के कार्यकाल में खर्च, कराधान और अन्य प्रमुख नीतियों पर निर्णय लेने की शक्ति किस दल के पास होगी।

Pratahkal Bureau

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