कौन हैं मेनका गुरुस्वामी जो बनीं भारत की पहली Queer MP? जानिए क्यों है ये ऐतिहासिक
भारत में मेनका गुरुस्वामी के राज्यसभा सदस्य बनने के साथ ही पहली बार कोई खुलकर LGBTQ+ पहचान वाला व्यक्ति संसद पहुंचा है। सेक्शन 377 मामले में उनकी भूमिका और कानूनी योगदान इस ऐतिहासिक उपलब्धि को और महत्वपूर्ण बनाते हैं, जो भारतीय राजनीति में समावेशिता का नया संकेत है।

वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य मेनका गुरुस्वामी
भारतीय लोकतंत्र में समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम तब दर्ज हुआ जब सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने राज्यसभा में प्रवेश करते हुए देश की पहली खुले तौर पर LGBTQ+ सदस्य के रूप में नई पहचान बनाई। अप्रैल 2026 में शपथ लेने के साथ ही उनका यह सफर केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बन गया।
27 फरवरी 2026 को All India Trinamool Congress ने उन्हें पश्चिम बंगाल से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किया था। 16 मार्च 2026 को हुए चुनाव में उनकी जीत ने भारतीय संसद के इतिहास में पहली बार LGBTQ+ समुदाय के खुले प्रतिनिधित्व का मार्ग प्रशस्त किया। वह वर्तमान में राज्यसभा में पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
1974 में जन्मी गुरुस्वामी का करियर कानून और मानवाधिकार के क्षेत्र में अत्यंत प्रभावशाली रहा है। वह Supreme Court of India में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और Columbia Law School में बी.आर. आंबेडकर रिसर्च स्कॉलर के रूप में कार्य कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने Yale Law School, New York University School of Law और University of Toronto Faculty of Law में भी अकादमिक योगदान दिया है।
उनकी पहचान विशेष रूप से Navtej Singh Johar v. Union of India मामले में उनकी निर्णायक भूमिका के कारण बनी, जिसके तहत 6 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने Section 377 of the Indian Penal Code को आंशिक रूप से निरस्त करते हुए सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। इस फैसले ने समानता, निजता और गरिमा जैसे मौलिक अधिकारों को नई मजबूती प्रदान की और 2013 के Suresh Kumar Koushal v. Naz Foundation निर्णय को पलट दिया।
सेक्शन 377 के वर्तमान प्रमुख पहलू:
- अपराधमुक्ति (Decriminalization): वयस्कों के बीच सहमति से बने निजी यौन संबंध (चाहे LGBTQ+ हों या विषमलैंगिक) अब अपराध नहीं हैं।
- जारी प्रावधान (Continued Application): यह कानून अब भी गैर-सहमति वाले यौन संबंधों, नाबालिगों से जुड़े मामलों और पशुता (bestiality) पर लागू होता है।
- ऐतिहासिक संदर्भ (Historical Context): 1860 में लागू यह कानून गैर-प्रजनन संबंधी यौन गतिविधियों को अपराध मानता था।
- कानूनी प्रभाव (Legal Impact): 2018 के फैसले ने 2013 के उस निर्णय को निरस्त कर दिया, जिसमें समलैंगिकता को दोबारा अपराध घोषित किया गया था।
गुरुस्वामी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने United Nations Development Fund और UNICEF के साथ मानवाधिकार कानून के क्षेत्र में कार्य किया है और नेपाल के संविधान निर्माण में भी योगदान दिया है। वर्ष 2019 में उन्होंने अपनी साथी वकील Arundhati Katju के साथ अपने संबंध को सार्वजनिक किया, जो उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन का महत्वपूर्ण पहलू रहा।
उनका संसद में प्रवेश केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय समाज में बदलती सोच और स्वीकार्यता का संकेत है। यह घटना न केवल LGBTQ+ समुदाय के लिए प्रतिनिधित्व का नया अध्याय खोलती है, बल्कि आने वाले समय में नीति निर्माण और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में भी गहरा प्रभाव छोड़ने की क्षमता रखती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
