पिच्छी पर टिप्पणी से आहत जैन समाज, मेनका गांधी को माफी मांगनी होगी या होगा देशव्यापी आंदोलन
मेनका गांधी ने पिच्छी पर की थी विवादित टिप्पणी, जैन समाज ने मांगी माफी और आंदोलन की चेतावनी दी।

जैन धर्म के पवित्र प्रतीक पिच्छी पर विवादित बयान देने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी|
जैन धर्म के पवित्र प्रतीक 'पिच्छी' को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा की गई कथित टिप्पणी पर उपजा विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। मुजफ्फरनगर में जैन समाज ने इस बयान पर कड़ा एतराज जताते हुए मेनका गांधी को कानूनी नोटिस भेजा है और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। इस प्रकरण ने जैन समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आंदोलित कर दिया है, जिसके चलते समाज ने देशभर में चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है।
विवाद की शुरुआत 17 जून को दिल्ली के लाल जैन मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने आरोप लगाया कि पिच्छी बनाने के लिए लाखों मोरों की हत्या की जाती है। जैन समाज ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे तथ्यहीन और अपमानजनक करार दिया है। अधिवक्ता निपुण जैन के अनुसार, जैन मुनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पिच्छी उन मोर पंखों से तैयार की जाती है जो प्राकृतिक रूप से झड़ जाते हैं। जैन एकता मंच की युवा शाखा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव जैन ने स्पष्ट किया कि पिच्छी का उद्देश्य किसी जीव को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि अहिंसा का पालन करते हुए सूक्ष्म जीवों की रक्षा करना है।
इस पूरे मामले के विरोध में मुजफ्फरनगर स्थित जैन अतिथि भवन में सर्वसमाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रस्ताव पारित कर मेनका गांधी के बयान की निंदा की गई। रणनीति के अनुसार, 30 जून को सोशल मीडिया के माध्यम से जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद 7 जुलाई को देशभर के जैन मंदिरों के बाहर सुबह 9 से 11 बजे तक शांतिपूर्ण मौन प्रदर्शन किया जाएगा। समाज ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को ज्ञापन भेजने का निर्णय भी लिया है।
जैन समाज का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार जैन धर्म के प्रतीकों, संतों और परंपराओं को निशाना बनाया जा रहा है। गिरनार और सम्मेद शिखर जैसे पवित्र स्थलों के बाद पिच्छी पर की गई यह टिप्पणी समाज के लिए अस्वीकार्य है। समुदाय ने सरकार से जैन संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और धार्मिक परंपराओं पर बिना तथ्यों के बयानबाजी करने वालों के खिलाफ प्रभावी नीति बनाने की मांग की है। समाज ने दोहराया है कि उनका आगामी आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा, लेकिन वे अपने धार्मिक अधिकारों और सम्मान से कोई समझौता नहीं करेंगे। कानूनी नोटिस के माध्यम से मेनका गांधी को अपना बयान वापस लेने की अंतिम चेतावनी दी गई है।

Lalita Rajput
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