"हिंदू बहुसंख्यक नहीं…” मौलाना नोमानी का बयान बना बहस का मुद्दा, सोशल मीडिया पर गरमाई बहस
मौलाना खलीलुर रहमान साज्जाद नोमानी का एक वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें उन्होंने विभिन्न समुदायों की पहचान और हिंदू जनसंख्या पर टिप्पणी की है। उनके बयान ने धार्मिक पहचान, जनगणना वर्गीकरण और राजनीतिक विमर्श को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जिससे सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

सोशल मीडिया पर इन दिनों ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के प्रवक्ता मौलाना खलीलुर रहमान साज्जाद नोमानी का एक वीडियो व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें उनके कथित बयान ने धार्मिक पहचान, सामाजिक वर्गीकरण और राजनीतिक विमर्श को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
वायरल हो रहे इस वीडियो में मौलाना नोमानी को विभिन्न समुदायों का उल्लेख करते हुए यह कहते हुए सुना जा रहा है कि अनुसूचित जातियों, आदिवासियों, तमिल समुदाय, लिंगायतों और जाटों जैसे समूहों को अलग-अलग पहचान के रूप में देखा जाए तो हिंदू समाज की संख्या पर अलग दृष्टिकोण बन सकता है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि यदि इन विविध समूहों को अलग श्रेणियों में रखा जाए तो हिंदू बहुसंख्यक स्थिति पर प्रश्न उठ सकते हैं। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में धार्मिक और सामाजिक पहचान को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस तेज है।
इसी संदर्भ में उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि हिंदुओं के भीतर “सेक्युलर हिंदू” और “फासीवादी हिंदू” जैसी राजनीतिक विभाजन की अवधारणाओं को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है, लेकिन उनका मानना था कि इस तरह की व्याख्याएँ अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं। उनके अनुसार, यह राजनीतिक समझ मुस्लिम समुदाय की धारणा को भी प्रभावित करती रही है।
Maulana At Islamic Summit in India:
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) June 18, 2026
"Thousands of Jats have declared themselves non-Hindu, Sikhs, Buddhists, tribals, Dalits, Lingayats, and the people of Tamil Nadu are also not Hindu; we have made Hindus a minority in this country too." pic.twitter.com/iYDhJEIuPr
वीडियो में आगे यह भी दावा किया गया है कि विभिन्न क्षेत्रों में समुदाय स्तर पर लोग अपनी पहचान को लेकर नए विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ हिस्सों में कथित रूप से यह चर्चा होने का उल्लेख किया गया कि कुछ लोग आधिकारिक रिकॉर्ड में खुद को सिख के रूप में दर्ज कराने पर विचार कर रहे हैं, हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
मौलाना नोमानी के इन बयानों ने सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की है, जहां अलग-अलग वर्ग इसे राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं। इस वीडियो के वायरल होने के साथ ही धार्मिक जनसंख्या, जनगणना वर्गीकरण और पहचान की राजनीति पर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
भारत में आधिकारिक जनगणना और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के आंकड़ों के अनुसार हिंदू जनसंख्या बहुसंख्यक बनी हुई है, हालांकि इस प्रकार के बयानों और व्याख्याओं के बाद सामाजिक और राजनीतिक विमर्श में नई परतें जुड़ती नजर आ रही हैं। ऐसे में यह मामला केवल एक बयान तक सीमित न रहकर व्यापक वैचारिक और राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनता दिख रहा है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
