भारत में महिलाओं के अधिकारों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, सांसद शशि थरूर ने 5 दिसंबर 2025 को लोकसभा में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया, जिसका उद्देश्य वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में लाना है। यह पहल लंबे समय से चर्चा में रहे “वैवाहिक बलात्कार अपवाद” को समाप्त करने की दिशा में एक प्रयास है, जिसके तहत वर्तमान कानून के अनुसार, 18 वर्ष से अधिक आयु की पत्नी के खिलाफ पति द्वारा जबरन यौन संबंध स्थापित करना दंडनीय नहीं है।

थरूर ने अपने बिल में कहा कि, “शादी किसी महिला के सहमति देने या न देने के अधिकार को समाप्त नहीं कर सकती।” उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान कानून का दृष्टिकोण “No Means No” से बदलकर “Only Yes Means Yes” होना चाहिए। उनका तर्क है कि विवाह महिला की आत्मनिर्णय की स्वतंत्रता पर कोई अधिकार नहीं डालता और किसी भी प्रकार का जबरन यौन संबंध अपराध की श्रेणी में आना चाहिए।

थरूर ने बिल के माध्यम से स्पष्ट किया कि वर्तमान कानून में मौजूद वैवाहिक बलात्कार अपवाद, विवाहित महिलाओं को कानूनी संरक्षण से वंचित करता है। उनके अनुसार, विवाह के नाम पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे सिर्फ वैवाहिक मामला न मानते हुए इसे हिंसा का मामला करार दिया और कहा कि कानून में बदलाव तुरंत आवश्यक है।

बिल में यह प्रावधान शामिल है कि यदि यह कानून पारित होता है, तो विवाहित महिलाएं भी वैसा ही कानूनी संरक्षण पाएंगी, जैसा कि अविवाहित महिलाओं को बलात्कार मामलों में मिलता है। इस पहल से भारत में महिलाओं के अधिकार और उनकी सुरक्षा के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव आने की संभावना है।

यह बिल पारित होने की स्थिति में भारतीय दंड संहिता में एक ऐतिहासिक बदलाव लाएगा। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि विवाह के बावजूद किसी महिला के खिलाफ यौन सहमति के बिना किया गया संबंध अपराध है। सामाजिक रूप से यह कदम महिलाओं के अधिकारों, उनके आत्मसम्मान और कानूनी समानता की दिशा में एक मजबूत संदेश देगा।

हालांकि, चूंकि यह एक प्राइवेट मेंबर बिल है, इसलिए इसे सरकार द्वारा पारित कराना जरूरी होगा। भारतीय संसद में अधिकांश प्राइवेट मेंबर बिलों को औपचारिक रूप से आगे नहीं बढ़ाया जाता। इसलिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और व्यापक समर्थन इस पहल की सफलता के लिए निर्णायक होगा। अगले चरण में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस बिल पर विचार करने के लिए सहमत होती है या नहीं। यदि बिल समिति में भेजा जाता है और चर्चा के बाद संशोधन होते हैं, तो इसके प्रभाव और कार्यान्वयन की दिशा तय होगी। विशेषज्ञों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया भी बिल के सामाजिक प्रभाव और कानूनी परिणामी दिशा को प्रभावित कर सकती है।



Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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