महाराष्ट्र की राजनीति में ₹500 करोड़ के कथित लेनदेन से जुड़े एक ऑडियो क्लिप ने सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना के बीच विवाद बढ़ा दिया है। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल की ओर से जारी इस कथित रिकॉर्डिंग में दावा किया गया है कि 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें शांत करने और मराठा समुदाय के आंदोलन को कमजोर करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के माध्यम से ₹500 करोड़ दिए थे। रिकॉर्डिंग में शिंदे के बेटे और लोकसभा सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के जरिए कथित तौर पर रकम पहुंचाए जाने का भी उल्लेख है। हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता और इसमें सुनाई देने वाली आवाजों की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

मनोज जरांगे पाटिल ने 22 अक्टूबर को जलना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह ऑडियो क्लिप सार्वजनिक की। उन्होंने दावा किया कि रिकॉर्डिंग में उनकी राजनीतिक ताकत को कम करने, मराठा आरक्षण आंदोलन की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने और उनके प्रभाव का मुकाबला करने के तरीकों पर बातचीत सुनाई देती है। कथित बातचीत में एक महिला यह कहते हुए सुनाई देती है कि भाजपा ने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले जरांगे पाटिल और मराठा समुदाय को शांत करने के लिए ₹500 करोड़ दिए थे। आरोप के मुताबिक, यह रकम डॉ. श्रीकांत शिंदे के माध्यम से पहुंचाई गई थी।

रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर जरांगे पाटिल के राजनीतिक प्रभाव को सीमित करने, उनके अभियान का जवाब देने और सोशल मीडिया सामग्री के जरिए उनके दावों को चुनौती देने की रणनीतियों पर भी चर्चा है। बातचीत में यह आशंका जताए जाने का दावा किया गया है कि जरांगे पाटिल भाजपा को मराठा विरोधी बताकर मराठवाड़ा क्षेत्र में पार्टी के लिए चुनावी चुनौती खड़ी कर सकते हैं। कथित बातचीत में मराठा और ओबीसी नेताओं को इस राजनीतिक प्रभाव के नतीजों पर विचार करने की बात भी सामने आई है।

जरांगे पाटिल ने आरोप लगाया कि मराठा आंदोलन को कमजोर करने और समुदाय के भीतर मतभेद पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया और न ही अपना आंदोलन छोड़ने के लिए सहमति दी। उन्होंने राज्य के नेतृत्व से आरोपों को गंभीरता से लेने और मामले की जांच सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी मामले की विस्तृत जांच कराने का आग्रह किया।

यह विवाद उस समय और बढ़ गया, जब एकनाथ शिंदे ने ₹500 करोड़ के कथित लेनदेन के आरोपों को खारिज करते हुए जरांगे पाटिल से अपने दावों के सबूत पेश करने को कहा। शिंदे ने कहा कि उन्होंने भाजपा से न तो ₹500 करोड़ लिए हैं और न ही इतनी रकम दी है। उन्होंने आरोपों का आधार स्पष्ट करने और उपलब्ध सबूत संबंधित अधिकारियों को सौंपने की चुनौती भी दी, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

विवाद की शुरुआत इस सप्ताह की शुरुआत में बीड जिले के नारायणगढ़ में जरांगे पाटिल की दशहरा रैली के दौरान हुई थी। उन्होंने दावा किया था कि वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं ने उन्हें बताया कि शिंदे ने कथित तौर पर भाजपा नेताओं को उनके लिए ₹500 करोड़ के भुगतान के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद उन्होंने कहा था कि उनके पास सबूत हैं और उचित समय पर उन्हें सार्वजनिक करेंगे। 22 अक्टूबर को ऑडियो जारी होने के बाद यह मामला महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर राजनीतिक टकराव का विषय बन गया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 23 अक्टूबर को ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि रिकॉर्डिंग में किसकी आवाज है और इसे ढाई साल बाद सामने लाने के पीछे क्या उद्देश्य है, इसकी जांच की जाएगी। फडणवीस के अनुसार, शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल ने भी जांच की मांग की है और भाजपा की ओर से भी मामले की पड़ताल की मांग उठाई गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि फॉरेंसिक तरीकों से मामले की गहन जांच की जाएगी, ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

शिवसेना के नेताओं ने इस रिकॉर्डिंग को एकनाथ शिंदे की छवि खराब करने की कोशिश बताते हुए जांच की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि ऑडियो में कथित तौर पर भाजपा से जुड़े कुछ लोगों की आवाजें सुनाई देती हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि रिकॉर्डिंग वास्तविक है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ भाजपा क्या कार्रवाई करेगी। वहीं, भाजपा की ओर से ऑडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं और इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार किए जाने की आशंका भी जताई गई है।

शिवसेना नेता रामदास कदम ने जरांगे पाटिल पर भाजपा के एक धड़े के साथ मिलकर एकनाथ शिंदे को राजनीतिक रूप से खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। कदम ने सवाल उठाया कि यदि ऑडियो वास्तविक है, तो इसे सार्वजनिक करने में इतना समय क्यों लगा। उन्होंने भाजपा नेताओं प्रवीण दरेकर और प्रसाद लाड के नामों का भी उल्लेख किया, जिनके इस विवाद से जुड़े होने की चर्चा सामने आई है। कदम ने प्रसाद लाड और जरांगे पाटिल की साथ भोजन करते हुए तस्वीरें भी दिखाईं और पूछा कि भाजपा में कौन लोग एकनाथ शिंदे को राजनीतिक रूप से कमजोर करना चाहते हैं।

कदम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर ऑडियो की विस्तृत फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि जरांगे पाटिल शिंदे को निशाना बनाते हैं, तो मराठा समुदाय उनके खिलाफ खड़ा हो सकता है। दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने भी आरोपों की जांच की मांग की है और संबंधित जांच एजेंसियों से मामले की पड़ताल कराने की बात कही है।

फिलहाल ₹500 करोड़ के कथित भुगतान, रिकॉर्डिंग में सुनाई देने वाली आवाजों और बातचीत के संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में ऑडियो में लगाए गए आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। अब फॉरेंसिक जांच के जरिए रिकॉर्डिंग की वास्तविकता, इसमें शामिल लोगों की पहचान और इसे सार्वजनिक किए जाने के पीछे के कारणों का पता लगाने पर ध्यान केंद्रित है। जांच के निष्कर्ष महाराष्ट्र की राजनीति में उठे इस विवाद और भाजपा-शिवसेना गठबंधन के बीच बढ़े तनाव को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।

Pratahkal Bureau

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