ममता बनर्जी के आवास तक पहुंची CID ; क्या टूटने की कगार पर है TMC का आंतरिक ढांचा?
CID की यह कार्रवाई अब एक साधारण आंतरिक प्रशासनिक विवाद से आगे बढ़कर एक व्यापक राजनीतिक और कानूनी जांच का रूप लेती दिख रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह मामला राज्य की राजनीतिक संरचना, पार्टी अनुशासन और निर्णय प्रक्रिया की पारदर्शिता पर महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर रहा है।

ममता बनर्जी के आवास पर सीआईडी का दौरा
कोलकाता की राजनीतिक हलचल के बीच एक अत्यंत संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम सामने आया है, जहां 9 जून 2026 (मंगलवार) को पश्चिम बंगाल अपराध जांच विभाग (CID) की एक टीम ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास का दौरा किया। यह कार्रवाई तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायकों से जुड़े कथित हस्ताक्षर फर्जीवाड़ा मामले की चल रही जांच का हिस्सा बताई जा रही है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस और गंभीरता जोड़ दी है, क्योंकि यह मामला पिछले कई हफ्तों से लगातार जांच के दायरे में है और अब शीर्ष नेतृत्व तक इसकी परतें पहुंचती दिख रही हैं।
यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय को भेजे गए एक आधिकारिक संचार से जुड़ा है, जो कथित रूप से TMC के आंतरिक निर्णयों से संबंधित था। आरोप है कि इस पत्र में लगभग 60 से 70 विधायकों के हस्ताक्षर शामिल थे, लेकिन बाद में कई विधायकों ने यह दावा किया कि उनके हस्ताक्षर या तो फर्जी थे या बिना उनकी अनुमति के उपयोग किए गए। कुछ विधायकों का कहना है कि उन्होंने उस निर्णय को न तो पूरी तरह स्वीकार किया था और न ही उसके लिए औपचारिक सहमति दी थी।
Huge contingent of CID officers reach former #WestBengal CM & #TMC supremo #MamataBanerjee’s residence in Kalighat to carry out a search in connection with the sign case. pic.twitter.com/tIPSRqjKA0
— Pooja Mehta (@pooja_news) June 9, 2026
जानकारी के अनुसार, यह पत्र विधानसभा में पार्टी के नामांकन या चयन से जुड़े निर्णयों तथा विधायकों के भीतर आंतरिक नेतृत्व व्यवस्था से संबंधित था। इसी प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं और हस्ताक्षर उपयोग को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, जिसने बाद में जांच का रूप ले लिया। इस मामले में CID की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और अब तक कई स्तरों पर पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसी ने अब तक 13 TMC विधायकों के बयान दर्ज किए हैं, जिनसे यह जानने की कोशिश की गई कि उन्होंने संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे या नहीं, हस्ताक्षर पत्रों का वितरण कैसे हुआ और उन्हें किसने अधिकृत किया।
इसके अलावा, कई वरिष्ठ नेताओं को भी जांच के दायरे में लिया गया है। इनमें अभिषेक बनर्जी जैसे प्रमुख नेताओं को CID की ओर से कई बार समन जारी किया गया है और पूछताछ के लिए बुलाया गया है। कुछ मामलों में उन्हें समय भी प्रदान किया गया है ताकि वे जांच प्रक्रिया में उपस्थित हो सकें। जांच के प्रारंभिक चरण में CID ने कई विधायकों के आवासों का दौरा किया, पार्टी सदस्यों के बयान दर्ज किए तथा कुछ मामलों में हस्ताक्षरों के फॉरेंसिक मिलान के लिए दस्तावेज और नमूने भी एकत्र किए।
इसी जांच प्रक्रिया के तहत CID की टीम कोलकाता के कालीघाट क्षेत्र स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर पहुंची। यह दौरा कथित रूप से जांच के दौरान मिले तथ्यों की पुष्टि और दस्तावेजी श्रृंखला (procedural chain) की जांच से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस दौरान किसी प्रकार की पूछताछ हुई या कोई दस्तावेज जब्त किए गए। यह कार्रवाई जांच के विस्तार और उसके उच्च स्तर तक पहुंचने का संकेत मानी जा रही है, जहां अब केवल विधायकों तक सीमित जांच से आगे बढ़कर राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह एक मौजूदा मुख्यमंत्री के आवास तक पहुंची जांच का हिस्सा है। इससे यह संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि विवादित पत्र की स्वीकृति और प्रक्रिया किस स्तर तक प्रभावित थी और क्या इसमें शीर्ष नेतृत्व की किसी प्रकार की जानकारी या भूमिका शामिल थी।
इससे पहले यह मामला केवल विधायकों की पूछताछ तक सीमित था, लेकिन अब जांच के दायरे में पार्टी नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया की परतें भी शामिल हो गई हैं। इस पूरे प्रकरण ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में व्यापक हलचल पैदा कर दी है। TMC के भीतर आंतरिक असंतोष और गुटबाजी को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ विधायकों द्वारा पार्टी के निर्णयों पर असहमति जताए जाने और सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने आने के बाद स्थिति और जटिल हो गई है।
विपक्षी दल इस मामले को राज्य में शासन व्यवस्था और राजनीतिक विश्वास से जुड़ा गंभीर संकट बता रहे हैं, जबकि TMC नेतृत्व इसे पार्टी के खिलाफ राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई करार दे रहा है। इस विवाद ने विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। CID की यह कार्रवाई अब एक साधारण आंतरिक प्रशासनिक विवाद से आगे बढ़कर एक व्यापक राजनीतिक और कानूनी जांच का रूप लेती दिख रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह मामला राज्य की राजनीतिक संरचना, पार्टी अनुशासन और निर्णय प्रक्रिया की पारदर्शिता पर महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर रहा है। आने वाले समय में इस जांच के नतीजे पश्चिम बंगाल की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
