सियासी बाज़ार में लगी है बोलियाँ? संजय राउत और महुआ मोइत्रा के बीच छिड़ी जुबानी जंग!
संजय राउत के सांसदों को 15 करोड़ के ऑफर के आरोप पर महुआ मोइत्रा ने कसा तंज, टीएमसी के 20 बागी सांसदों के विलय से राजनीति गरमाई।

बायीं ओर शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत और दाईं ओर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा|
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत के एक हालिया दावे पर तंज कसते हुए राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। संजय राउत ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के सांसदों को दल बदलने के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रलोभन दिया जा रहा है। इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए महुआ मोइत्रा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक कटाक्षपूर्ण टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने इस राशि को बहुत कम बताया।
संजय राउत ने अपने पोस्ट में दावा किया था कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए 15 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि की पेशकश की गई है। इस पर महुआ मोइत्रा ने रिट्वीट करते हुए लिखा कि केवल 15 करोड़ रुपये? यह काफी कम है। उन्होंने आगे कहा कि उनके पास तो इसके मुकाबले कहीं अधिक राशि के ऑफर मौजूद हैं, जिसमें हर महीने मिलने वाले वेतन के अलावा अन्य लाभ भी शामिल हैं। महुआ मोइत्रा का यह बयान राजनीतिक सौदेबाजी और दल-बदल को लेकर एक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी खलबली मचा दी है। पार्टी के 20 बागी सांसदों ने हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने 'नेशनल सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय करने की घोषणा की है। इस घटनाक्रम के बाद बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। महुआ मोइत्रा ने पूर्व क्रिकेटर और पार्टी के बागी नेता यूसुफ पठान पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तियों के लिए संघर्ष करना व्यर्थ था जिनमें न तो नेतृत्व क्षमता है और न ही नैतिकता। उन्होंने यूसुफ पठान को कमेंट्री करने की सलाह देते हुए उनकी आलोचना की।
संजय राउत के इन आरोपों से पहले शिवसेना (UBT) के लोकसभा सदस्य अनिल देसाई ने भी ऐसी किसी भी संभावना को खारिज किया था कि उनकी पार्टी के सांसद अलग गुट बनाने की योजना बना रहे हैं। बहरहाल, विपक्षी दलों के इन दावों ने केंद्र में सत्तारूढ़ दल के खिलाफ एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। जहां विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक और खरीद-फरोख्त का मामला बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ खेमे की ओर से इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सांसदों के इस दल-बदल और कथित वित्तीय प्रलोभन के मामलों पर और अधिक स्पष्टता सामने आएगी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
