ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत का बड़ा कदमहोर्मुज से निकला तिरंगा लगा जहाज, राजदूत को तलब कर दी चेतावनी,
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा का भरोसा दिया, मंत्रालय ने नागरिकों से घबराहट में ईंधन न खरीदने की अपील की।

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने देश में घरेलू एलपीजी और पीएनजी की निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन दिया है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अभूतपूर्व तत्परता दिखाई है। रविवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक विस्तृत अपडेट जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी, पीएनजी और कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह से सामान्य है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और ईंधन की 'पैनिक बाइंग' यानी घबराहट में खरीदारी करने से बचें। सरकार ने साफ किया है कि देश के किसी भी हिस्से में एलपीजी 'डाई-आउट' या सप्लाई ठप होने की कोई सूचना नहीं मिली है और घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी तय मानकों के अनुरूप सुचारू रूप से चल रही है।
कूटनीतिक मोर्चे पर भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया है। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भारतीय जहाजों से जुड़ी गोलीबारी की हालिया घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत का यह कदम वैश्विक व्यापार मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस बीच, एक राहत भरी खबर यह रही कि भारतीय ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर 'देश गरिमा', जिसमें 31 भारतीय नाविक सवार थे, सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह जहाज 22 अप्रैल 2026 तक मुंबई बंदरगाह पर लंगर डाल देगा, जो भारत के ऊर्जा आयात की निरंतरता का एक जीवंत प्रमाण है।
आंतरिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने सप्लाई और मांग दोनों स्तरों पर कई कड़े उपाय लागू किए हैं। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को ही देश भर में 53.5 लाख से अधिक घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी सफलतापूर्वक की गई है। इसके अतिरिक्त, डिजिटल बुकिंग को बढ़ावा देने के लिए 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड' (DAC) आधारित व्यवस्था को 93 प्रतिशत से अधिक प्रभावी बनाया गया है, ताकि कालाबाजारी और गैस के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके। व्यावसायिक एलपीजी के क्षेत्र में अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों जैसे फार्मा और कृषि को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रवासी मजदूरों की जरूरतों को देखते हुए 5 किलो वाले एफटीएल (FTL) सिलेंडरों की दैनिक सप्लाई को भी दोगुना कर दिया गया है।
कानूनी प्रावधानों की बात करें तो केंद्र ने राज्यों को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और एलपीजी नियंत्रण आदेश, 2000 के तहत कड़ी निगरानी के निर्देश दिए हैं। राज्यों को अधिकार दिया गया है कि वे किसी भी प्रकार की जमाखोरी या कृत्रिम कमी पैदा करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। रिफाइनरियों को पूरी क्षमता से काम करने और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। यह स्पष्ट किया गया है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुकिंग अंतराल को बढ़ाकर सप्लाई चेन को संतुलित किया गया है ताकि अंतिम उपभोक्ता तक ईंधन की पहुंच बनी रहे। सरकार का यह व्यापक रोडमैप न केवल वर्तमान संकट से निपटने के लिए है, बल्कि यह देश की आत्मनिर्भरता और रणनीतिक दूरदर्शिता को भी रेखांकित करता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
