चुनावी हार के बाद परिवार को किया 'डिसऑन' ; लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी का बड़ा निर्णय..
बिहार चुनावों में आरजेडी की हार के बाद लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने और परिवार से “डिसऑन” करने की घोषणा कर दी। यह फैसला बिहार की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।

बिहार की राजनीति में एक अप्रत्याशित भूचाल तब आया जब आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक रूप से राजनीति से संन्यास लेने और अपने ही परिवार से दूरी बनाने का निर्णय घोषित कर दिया। बिहार विधानसभा चुनावों में आरजेडी के कमजोर प्रदर्शन के बाद आया यह कदम न केवल पार्टी के भीतर नई हलचल पैदा कर गया, बल्कि लालू परिवार के राजनीतिक समीकरणों पर भी कई नए सवाल खड़े कर गया।
परिणाम घोषित होने के कुछ ही घंटों बाद रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराज़गी और आहत मनोदशा जाहिर करते हुए लिखा कि वे राजनीति छोड़ रही हैं और अपने परिवार से भी “डिसऑन” कर रही हैं। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीतिक बहस में एक नई परत जोड़ दी। चुनावी हार के बाद आरजेडी जहां भीतरखाने समीक्षा में जुटी थी, वहीं रोहिणी का यह अप्रत्याशित ऐलान पार्टी नेतृत्व की दिशा और आंतरिक मतभेदों को और उजागर करता हुआ दिखाई दिया।
I’m quitting politics and I’m disowning my family …
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) November 15, 2025
This is what Sanjay Yadav and Rameez had asked me to do …nd I’m taking all the blame’s
सूत्रों के अनुसार, रोहिणी की नाराज़गी की जड़ें पार्टी के अंदरूनी संघर्षों और चुनावी प्रबंधन से जुड़ी हैं। कई अवसरों पर उन्होंने संकेत दिया था कि कुछ व्यक्तियों की वजह से चुनाव की रणनीति प्रभावित हुई, जिससे पार्टी को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी का सीधा नाम नहीं लिया, लेकिन संकेतों ने राजनीतिक गलियारों में बहस को तेज़ कर दिया है। पारिवारिक समीकरणों में दरार का यह सार्वजनिक रूप दुर्लभ है, क्योंकि लालू परिवार अपनी राजनीतिक एकजुटता के लिए जाना जाता रहा है।
इस फैसले के बाद आरजेडी नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है—एक ओर चुनावी हार का विश्लेषण और दूसरी ओर पार्टी की सबसे मुखर और सक्रिय पारिवारिक आवाज़ों में से एक के राजनीतिक तिलांजलि देने का असर। बिहार की राजनीति में रोहिणी आचार्य एक ऐसा चेहरा थीं, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर पार्टी की नीतियों और नेतृत्व का खुले तौर पर बचाव करती थीं। उनके अचानक पीछे हटने को राजनीतिक पर्यवेक्षक आरजेडी की रणनीतिक दिशा और संगठनात्मक संतुलन के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं।
कानूनी या आधिकारिक मोर्चे पर हालांकि किसी तरह की प्रतिबंधात्मक कार्रवाई या प्रक्रियात्मक घोषणा की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि रोहिणी चुनावी पद पर नहीं थीं। लेकिन उनका बयान राजनीतिक प्रतीकवाद से भरपूर है, जो भविष्य में पार्टी की आंतरिक संरचना और शक्ति-संतुलन में बदलाव का संकेत दे रहा है। आरजेडी के भीतर से अभी तक इस मामले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, परन्तु पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच स्थिति को लेकर असमंजस स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
बिहार की राजनीति लंबे समय से पारिवारिक प्रभाव और नेतृत्व केंद्रित ढांचे में चलती आई है। ऐसे में लालू प्रसाद यादव की बेटी का परिवार से नाता तोड़ने जैसा कठोर बयान भविष्य में समीकरणों को किस दिशा में मोड़ेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत निर्णय है, बल्कि बिहार की राजनीति में हो रहे व्यापक परिवर्तनों का संकेत भी देती है। आने वाले दिनों में यह कदम राज्य की सत्ता, विपक्ष और पारिवारिक राजनीति—तीनों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
