केरल में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के पूर्ण गायन को लेकर राज्य की राजनीति में एक नया और तीखा विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के सेक्रेटरी एमवी गोविंदन मास्टर ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी के लिए काम कर रही है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भी इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए दो टूक शब्दों में विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस नेताओं का साफ कहना है कि केरल में किसी भी कीमत पर राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण नहीं गाया जाएगा और केवल पारंपरिक व्यवस्था के तहत ही इसका गायन किया जाएगा।

इस विवाद की शुरुआत तिरुवनंतपुरम से हुई, जहां केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन और कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने सार्वजनिक रूप से यह बयान दिया कि राज्य के भीतर राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' का पूरा संस्करण नहीं गाया जाएगा। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि केरल में हमेशा की तरह राष्ट्रगीत के केवल शुरुआती दो अंतरा ही गाए जाएंगे। उनका यह भी कहना था कि पूर्ववर्ती समय में भी राज्य सरकार के सभी आधिकारिक कार्यक्रमों में केवल पहले दो अंतरा ही गाने की परंपरा रही है और यह मौजूदा व्यवस्था आगे भी इसी रूप में जारी रहेगी।

कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने अपने तीखे तेवर दिखाते हुए एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान यहां तक कह दिया कि केरल में इस जन्म में पूरा 'वंदे मातरम्' नहीं गाया जाएगा। सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें मुख्य सचिव द्वारा राष्ट्रीय गीत के पूर्ण गायन के संबंध में जारी किए गए किसी भी निर्देश की कोई औपचारिक जानकारी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें गोली मारने की धमकी ही क्यों न दे दें, इस गीत को पूरा नहीं गाया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह गीत ठीक उसी तरह से गाया जाता रहेगा जिस तरह से अब तक राज्य में गाया जाता रहा है और इससे अधिक कुछ भी नहीं दोहराया जाएगा।

कांग्रेस और अन्य नेताओं की यह तीखी प्रतिक्रिया केरल के मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा द्वारा पिछले महीने की 6 तारीख को जारी किए गए उस पत्र के बाद सामने आई है, जिसमें राष्ट्रगीत के पूर्ण गायन से जुड़ी बातें कही गई थीं। मुख्य सचिव के उस पत्र के अनुसार, यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति की मंजूरी के बाद लिया गया था। पत्र में यह निर्देश दिया गया था कि 'आजादी का अमृत महोत्सव' के तहत वर्ष 2022 में शुरू किए गए इस अभियान के मौजूदा संस्करण को राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देश भर में आयोजित होने वाले स्मरणोत्सव के तीसरे चरण के साथ जोड़ दिया जाए।

जारी किए गए दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया था कि इस निर्धारित अवधि के दौरान राज्य के सभी आयोजनों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ-साथ 'वंदे मातरम्' का सामूहिक गायन भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही डिजिटल भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए 'हर घर तिरंगा' पोर्टल के माध्यम से नागरिकों से तिरंगे के साथ अपनी सेल्फी अपलोड करने का आग्रह किया गया था। यह पूरा पत्र संस्कृति मंत्रालय की ओर से 'हर घर तिरंगा' अभियान के संबंध में प्राप्त हुए एक आधिकारिक आदेश के बाद अमल में लाया गया था, जिसे इस वर्ष 9 से 17 अगस्त के बीच मनाया जाना तय किया गया है। पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया था कि वंदे मातरम् के गायन को लेकर भारत सरकार के सभी निर्देशों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

मुख्य सचिव के इस पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मंत्री मुरलीधरन ने कहा कि मुख्य सचिव कई बार केंद्र सरकार के प्रशासनिक निर्देशों के तहत ही परिपत्र जारी करते हैं क्योंकि ऐसा करना उनके प्रशासनिक दायित्वों का हिस्सा होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसके बावजूद केरल सरकार इसे स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है और हम अपनी पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था को ही आगे भी जारी रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के सभी आयोजनों और कार्यक्रमों में उसी पुराने और स्थापित प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा, जिसके तहत केवल पहले दो अंतरा ही गाए जाते हैं।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हाल ही में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राष्ट्रगीत का पूर्ण गायन इसलिए किया गया था क्योंकि वह विशेष कार्यक्रम राज्य के राज्यपाल की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित हुआ था। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों में राज्यपाल की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों में केंद्र सरकार के निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होता है, लेकिन इसके विपरीत केरल सरकार के अपने आयोजनों में केंद्र के इस प्रोटोकॉल को कतई फॉलो नहीं किया जाएगा और वहां केवल राज्य सरकार के तयशुदा नियमों का ही पालन होगा।

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी मुखर होकर विरोध जताया है। सीपीएम ने राष्ट्रीय गीत का पूर्ण गायन कराने से संबंधित इस पत्र को जारी किए जाने की तीव्र आलोचना की है और इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार इस तरह के निर्देश जारी करके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के एजेंडे के आगे घुटने टेक रही है। कांग्रेस सांसद उन्नीथन ने भी राज्यपाल कार्यालय पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राजभवन ओछी राजनीति के केंद्र बन चुके हैं और राज्यपाल धनबल के सहारे लोकतंत्र को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे हालात में जनता राज्यपालों से न्याय की उम्मीद कैसे कर सकती है, क्योंकि वे पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन नजर आते हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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