कांशीराम के परिवार को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज है। बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की बहन स्वर्ण कौर और उनके भतीजे लखबीर सिंह का नाम मायावती और बसपा से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम में सामने आता रहा है। 2021 में दोनों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान बसपा को लेकर अपना रुख सार्वजनिक किया था। Yug Jagran

कांशीराम की छोटी बहन स्वर्ण कौर और भतीजे लखबीर सिंह ने मायावती पर बसपा को अपने कब्जे में लेने का आरोप लगाया था। स्वर्ण कौर ने कहा था कि मायावती ने उस पार्टी को खत्म कर दिया जिसे कांशीराम ने खड़ा किया था और उसे पारिवारिक उद्यम में बदल दिया। उन्होंने यह भी कहा था कि इतने वर्षों में गरीबों के लिए कुछ नहीं किया गया। Yug Jagran

कांशीराम फाउंडेशन की प्रमुख स्वर्ण कौर ने उस समय कहा था कि उनके परिवार का किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। वहीं उनके भतीजे लखबीर सिंह ने कहा था कि वह लखनऊ स्थित कांशीराम स्मारक गए थे और वहां बसपा संस्थापक के साथ मायावती की प्रतिमा देखकर दुखी हुए। उन्होंने मायावती पर पार्टी में कब्जा करने और उसे प्राइवेट लिमिटेड फर्म में बदलने का आरोप लगाया था। Raftaar Media Network

लखबीर सिंह ने उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर कहा था कि वे ऐसे किसी भी व्यक्ति का समर्थन करेंगे जो बसपा को हरा सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि पंजाब में भी बसपा के खिलाफ प्रचार करेंगे, जहां उस समय बसपा अकाली दल के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही थी। Raftaar Media Network

इससे पहले भी कांशीराम के परिवार की ओर से मायावती को लेकर नाराजगी सामने आती रही है। 2014 में कांशीराम की बहन स्वर्ण कौर ने मायावती पर गंभीर आरोप लगाए थे और कहा था कि मायावती के बसपा अध्यक्ष रहते परिवार बसपा को वोट नहीं देगा। उन्होंने मायावती पर कांशीराम के करीबी लोगों और पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को बाहर किए जाने का आरोप भी लगाया था। AajTak

कांशीराम के परिवार और मायावती के बीच मतभेद का यह सिलसिला बाद के वर्षों में भी चर्चा में रहा। 2019 में स्वर्ण कौर ने मायावती के बजाय चंद्रशेखर को समर्थन देने की बात कही थी और आरोप लगाया था कि मायावती ने कांशीराम के उसूलों से समझौता किया है। Amar Ujala

इस पूरे घटनाक्रम में कांशीराम की बहन स्वर्ण कौर और भतीजे लखबीर सिंह के सार्वजनिक बयानों ने उनके परिवार और बसपा के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेद को राजनीतिक चर्चा का विषय बनाया है। कांशीराम की राजनीतिक विरासत को लेकर परिवार की ओर से सामने आए ये रुख उत्तर प्रदेश की बहुजन राजनीति में उनकी भूमिका और मायावती के साथ संबंधों को लेकर लगातार ध्यान खींचते रहे हैं।

Pratahkal Bureau

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