चेन्नई: दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक राज्य तमिलनाडु में एक बार फिर बड़े सियासी भूचाल के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई राज्य के भीतर एक नए और स्वतंत्र आंदोलन की शुरुआत करने जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि इस आंदोलन के जरिए वे समान विचारधारा वाले लोगों को एकजुट कर एक बेहद मजबूत स्वयंसेवक आधार तैयार करने की फिराक में हैं। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि इस नए संगठन का नाम 'मक्कल शक्ति अय्यकम' यानी जन शक्ति आंदोलन हो सकता है, जो भविष्य में एक स्वतंत्र राजनीतिक दल का रूप ले सकता है। इस संभावित कदम ने तमिलनाडु के स्थापित राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से गरमा दिया है।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अन्नामलाई अपने मौजूदा गैर-सरकारी संगठन 'वी द लीडर्स' के माध्यम से इस नए आंदोलन की जमीन तैयार कर रहे हैं। इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के युवाओं को सीधे राजनीति की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें संगठित नेतृत्व के लिए विशेष प्रशिक्षण देना है। हालांकि, नई पार्टी के गठन को लेकर अन्नामलाई की तरफ से अभी तक कोई भी आधिकारिक या औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उनके इस कदम को भाजपा से पूरी तरह अलग होकर खुद का एक नया और समर्पित कैडर स्थापित करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। विपक्षी दल कांग्रेस के सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस पर चुटकी लेते हुए तंज कसा है कि राज्य में एक और नई पार्टी का उदय होने वाला है।

इस पूरे सियासी घटनाक्रम के पीछे केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों को लेकर उभरे गंभीर वैचारिक मतभेद बताए जा रहे हैं। कभी तमिलनाडु में राष्ट्रीय शिक्षा नीति और केंद्र के तीन-भाषा फॉर्मूले के सबसे आक्रामक और मुखर समर्थक रहे अन्नामलाई का रुख अचानक बदल गया है। उन्होंने कक्षा 9 के छात्रों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा अनिवार्य की जा रही तीन-भाषा नीति को तुरंत वापस लेने की मांग उठा दी है। अन्नामलाई ने सार्वजनिक रूप से तर्क दिया कि बिना तैयारी के अचानक लागू की गई इस नीति से तमिलनाडु के छात्रों और अभिभावकों पर भारी मानसिक तनाव पैदा हो रहा है, जो बच्चों के सीखने की समग्र क्षमता को प्रभावित करेगा।

इससे पहले जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और सत्तारूढ़ दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने केंद्र सरकार पर राज्य के भीतर जबरन हिंदी थोपने का आरोप लगाया था, तब अन्नामलाई ने द्रमुक की राजनीति पर तीखे हमले किए थे। परंतु अब स्वयं अन्नामलाई द्वारा इस नीति के क्रियान्वयन की शैली का विरोध किए जाने से राजनीतिक विश्लेषक हैरान हैं। अन्नामलाई का कहना है कि उनकी आपत्ति मूल नीति पर नहीं, बल्कि उसे बिना पूर्व सूचना के अचानक लागू करने के तरीके पर है, जिसने अभिभावकों को स्तब्ध कर दिया है।

इस बीच, आंतरिक खींचतान और अफवाहों पर विराम लगाने का प्रयास करते हुए भाजपा के प्रदेश सचिव विनोद पी. सेल्वम ने कहा है कि अन्नामलाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति गहरी श्रद्धा और अटूट स्नेह के चलते ही राजनीति में आए थे, जिस पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता। उन्होंने कहा कि फैलाई जा रही तमाम तरह की अटकलों का सही जवाब स्वयं अन्नामलाई ही दे सकते हैं। गौरतलब है कि साल 2020 में पुलिस सेवा छोड़कर राजनीति में कदम रखने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने 2021 से 2025 तक प्रदेश भाजपा की कमान संभाली थी।

तमिलनाडु की जमीन पर पारंपरिक राजनीतिक ढर्रे को तोड़ते हुए भाजपा में नई ऊर्जा फूंकने का श्रेय अन्नामलाई की आक्रामक शैली को ही दिया जाता है। उनकी इसी मुखरता के कारण केंद्रीय नेतृत्व भी उनकी बातों को प्राथमिकता देता था। परंतु, क्षेत्रीय नेताओं और गठबंधन सहयोगियों पर की गई कुछ विवादास्पद टिप्पणियों के कारण ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के साथ भाजपा का पुराना गठबंधन टूट गया, जिससे दोनों ही दलों को चुनावों में भारी राजनीतिक क्षति उठानी पड़ी थी। इसी नाराजगी के चलते अंततः भाजपा आलाकमान ने उनके स्थान पर नैनार नागेंद्रन को राज्य की कमान सौंप दी थी, जिसके बाद अब अन्नामलाई अपने नए सफर की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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