झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। राज्य के विभिन्न प्रशासनिक परीक्षाओं में धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ छात्र पिछले कई दिनों से राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में अब राजनीतिक गलियारों से भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी की अलीनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक और प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने इन प्रदर्शनकारी छात्रों का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने छात्रों के इस आंदोलन को पूरी तरह से शांतिपूर्ण करार देते हुए अपनी गहरी संवेदना और समर्थन व्यक्त किया है।

मैथिली ठाकुर ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि झारखंड सरकार को बिना किसी देरी के इन छात्रों से सीधे बातचीत करनी चाहिए और उनकी समस्याओं व शिकायतों को सुनना चाहिए। उन्होंने आंदोलन कर रहे युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि उनका विरोध प्रदर्शन बेहद शांतिपूर्ण है, जिसे देखकर वह काफी प्रभावित हुई हैं। उन्होंने अपने विचार रखते हुए अंग्रेजी और हिंदी के मिले-जुले अंदाज में कहा कि यह एक 'पीस फुल प्रोटेस्ट' है और वह झारखंड के इन छात्र-छात्राओं के अनुशासन से बेहद इंप्रेस हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर सामने आ रहे विभिन्न वीडियो, भाषणों और पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि छात्रों का यह अनुशासित व्यवहार वास्तव में सराहनीय है।

आंदोलन के बीच रांची के इस प्रमुख स्थल पर कई छात्र अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं, जिनमें से कई विद्यार्थी भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर जब सरकार और छात्रों के बीच चल रही बातचीत के बारे में पूछा गया, तो मैथिली ठाकुर ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई आधिकारिक या फॉर्मल बात सामने नहीं आती, तब तक पर्दे के पीछे चल रही अंदरूनी चर्चाओं के बारे में कुछ भी पुख्ता तौर पर कहना मुश्किल है। हालांकि, उन्होंने पूरी उम्मीद जताई कि राज्य सरकार जल्द ही संवेदनशीलता दिखाते हुए इन युवाओं की बात सुनेगी और इस गतिरोध का कोई सकारात्मक हल निकालेगी।

लोकतांत्रिक व्यवस्था का हवाला देते हुए बीजेपी विधायक ने जोर देकर कहा कि देश के हर नागरिक को अपनी बात रखने और सरकार के समक्ष अपनी मांगें प्रस्तुत करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में भविष्य में किसी भी प्रकार की धांधली या अनियमितता को रोकने के लिए कड़े नियम और कानून बनाए जाने बेहद आवश्यक हैं। लोकतंत्र में सबको अपनी आवाज उठाने का हक है, लेकिन हर विरोध का एक निश्चित और शालीन तरीका होता है, जो इन छात्रों के प्रदर्शन में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। इस बीच, छात्रों के इस आंदोलन को देश के अन्य हिस्सों से भी समर्थन मिलने लगा है, और जंतर-मंतर पर नीट छात्रों की मदद करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता भी रांची पहुंचकर इन अभ्यर्थियों के साथ खड़े नजर आए हैं।

दूसरी ओर, इस पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक घटनाक्रम के बीच झारखंड उच्च न्यायालय की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी सामने आई है। अदालत ने राज्य वन विभाग से जुड़े एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी के अध्यक्ष का पद एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनाक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि ऐसे संवैधानिक पदों को लंबे समय तक खाली नहीं छोड़ा जा सकता है। जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय से यानी 21 जुलाई को एल. खियांग्ते के इस्तीफे के बाद से ही जेपीएससी अध्यक्ष का यह पद रिक्त चल रहा है, जिसे लेकर राज्य में प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। कुल मिलाकर, छात्रों का यह आंदोलन और उस पर आ रही राजनीतिक व न्यायिक प्रतिक्रियाएं झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा मुद्दा बन चुकी हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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