कैरिबियाई राष्ट्र त्रिनिदाद और टोबैगो की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर का स्वागत न केवल प्रोटोकॉल के तहत हुआ, बल्कि इसमें एक ऐसी आत्मीयता दिखी जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पन्नों पर एक दिलचस्प अध्याय लिख दिया। पोर्ट ऑफ स्पेन में आयोजित संसद के विशेष सत्र के दौरान एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने वहां मौजूद प्रतिनिधियों के चेहरे पर मुस्कान ला दी। जब संसद के स्पीकर डॉ. जयशंकर का परिचय करा रहे थे, तो उनकी जुबान फिसल गई और उन्होंने जयशंकर को 'त्रिनिदाद का विदेश मंत्री' कहकर संबोधित कर दिया। हालांकि, उन्होंने तुरंत अपनी गलती सुधारी और उन्हें 'भारत का विदेश मंत्री' कहा, लेकिन इस छोटी सी चूक ने दोनों देशों के बीच के गहरे जुड़ाव को उजागर कर दिया।

इस अवसर पर त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर ने स्थिति को बेहद खूबसूरती से संभालते हुए कहा कि वह भी डॉ. जयशंकर को अपने ही देश का हिस्सा मानना चाहेंगी। प्रधानमंत्री का यह बयान उस 'मिनी इंडिया' की भावना को दर्शाता है, जो इस देश की जड़ों में बसा है। लगभग 14 लाख की आबादी वाले इस देश में 42 प्रतिशत से अधिक लोग भारतीय मूल के हैं, जिनके पूर्वज दशकों पहले गिरमिटिया मजदूर के रूप में यहां आए थे और आज वहां की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज का अभिन्न अंग हैं।

डॉ. जयशंकर की इस यात्रा का उद्देश्य केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं था, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली यात्रा के दौरान तय किए गए लक्ष्यों को धरातल पर उतारने की एक रणनीतिक कोशिश थी। विदेश मंत्री ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि भारत और त्रिनिदाद के बीच सहयोग का दायरा अब डिजिटल भुगतान, फार्मास्यूटिकल्स और ऊर्जा सुरक्षा जैसे आधुनिक क्षेत्रों तक फैल चुका है। उन्होंने विशेष रूप से गर्व के साथ उल्लेख किया कि त्रिनिदाद और टोबैगो कैरिबियाई क्षेत्र का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI सिस्टम को अपनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के अधिकारी इस संबंध में स्थानीय प्रशासन के साथ निरंतर संपर्क में हैं।

फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में भी भारत एक नई भूमिका निभाने के लिए तैयार है। डॉ. जयशंकर ने रेखांकित किया कि भारत दुनिया में सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा प्रदाता है। त्रिनिदाद द्वारा 'इंडियन फार्माकोपिया' को आधिकारिक मान्यता दिए जाने के बाद अब दोनों देशों के बीच चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग के द्वार पूरी तरह खुल चुके हैं। इसके अतिरिक्त, ऊर्जा के क्षेत्र में विशेष रूप से रिफाइनिंग और डाउनस्ट्रीम उद्योगों में भारतीय निवेश और सहयोग की प्रबल संभावनाएं देखी जा रही हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और त्रिनिदाद के ऊर्जा मंत्रालय के बीच चल रही बातचीत भविष्य में इस द्वीप राष्ट्र की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नया आयाम दे सकती है।

डॉ. जयशंकर की यह यात्रा भारत की 'सॉफ्ट पावर' और मजबूत कूटनीतिक पहुंच का प्रमाण है। 150 वर्षों से अधिक के ऐतिहासिक संबंधों को आज डिजिटल और औद्योगिक प्रगति के साथ जोड़कर भारत वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। संसद में हुआ वह हल्का-फुल्का क्षण वास्तव में उस सांस्कृतिक सेतु का प्रतीक था, जो सात समंदर पार भी भारत और त्रिनिदाद को एक सूत्र में पिरोए हुए है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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