"मोदी जी पाकिस्तान को अलग-थलग करने में फेल रहे..." अमेरिका-ईरान वार्ता पर कांग्रेस का केंद्र पर बड़ा प्रहार!
जयराम रमेश ने अमेरिका-ईरान वार्ता में पाकिस्तान की मेजबानी को बताया मोदी सरकार की कूटनीतिक विफलता।

नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेता जयराम रमेश (मध्य) ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की आलोचना की।
नई दिल्ली: भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पड़ोसी देशों की बदलती भूमिका को लेकर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता का हवाला देते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। मुख्य विपक्षी दल का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्तमान कूटनीतिक रणनीति पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने में न केवल विफल रही है, बल्कि अब वह देश एक नई अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर रहा है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस घटनाक्रम को भारत की विदेश नीति के लिए एक बड़ा झटका करार दिया है। उन्होंने सोमवार को कड़े शब्दों में कहा कि जिस देश को भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 'आतंकवाद का प्रायोजक' और आर्थिक रूप से जर्जर घोषित करने का प्रयास किया, वही पाकिस्तान आज दो बड़े देशों के बीच शांति वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी कर रहा है। जयराम रमेश ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पुराने बयानों का स्मरण कराते हुए तंज कसा कि जिस देश को कभी 'दलाल' कहा गया था, वह आज कूटनीतिक मध्यस्थ के रूप में उभर रहा है।
कांग्रेस नेता ने अपने तर्कों में ऐतिहासिक संदर्भों और वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों को जोड़ते हुए कहा कि यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। उनके अनुसार, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वर्तमान में गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है और वह पूरी तरह से मित्र देशों की वित्तीय सहायता पर निर्भर है। इसके बावजूद, ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादियों को पनाह देने और अफगानिस्तान में अस्थिरता पैदा करने वाला देश अब महत्वपूर्ण राजनयिक भूमिका निभा रहा है। रमेश ने पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना और वहां के नेतृत्व ने सीमा पार आतंकवाद को ऑक्सीजन दी है, फिर भी वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हैं।
कांग्रेस ने मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद भारत ने सफलतापूर्वक पाकिस्तान को वैश्विक पटल पर अलग-थलग कर दिया था। रमेश ने दावा किया कि वर्तमान में पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उनका तंत्र, अमेरिकी प्रशासन, विशेष रूप से राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी सहयोगियों को साधने में भारत की तुलना में अधिक सफल रहे हैं। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी की क्षेत्रीय और वैश्विक भागीदारी की विफलता बताया और कहा कि भारत के कूटनीतिक संपर्क के तरीकों में तत्काल और आमूल-चूल बदलाव की आवश्यकता है।
इस विवाद के केंद्र में वह शांति वार्ता है जिसकी मेजबानी कथित तौर पर पाकिस्तान कर रहा है। कांग्रेस का मानना है कि यह घटनाक्रम भारत की उस रणनीति को चुनौती देता है जिसमें पाकिस्तान को एक 'अछूत' राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया था। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री मोदी वर्तमान वैश्विक समीकरणों को समझने और भारत के हितों को सुरक्षित रखने में 'बिलकुल असमर्थ' सिद्ध हो रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक राजनीति में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और भारत अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति को प्रभावी बनाने का प्रयास कर रहा है। विपक्षी दल के इन आरोपों ने सरकार की विदेश नीति की प्रभावशीलता और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों के भविष्य पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
