इस्लामाबाद: भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे संबंधों में सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) एक नया फ्लैशपॉइंट बनकर उभरी है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि नई दिल्ली ने पाकिस्तान की ओर आने वाले पानी के बहाव को रोकने या मोड़ने का प्रयास किया, तो इस्लामाबाद इसे 'युद्ध की कार्रवाई' (Act of War) के रूप में देखेगा। डार ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपनी संप्रभुता और संसाधनों की रक्षा के लिए किसी भी दुस्साहस का पूरी सैन्य ताकत और दृढ़ संकल्प के साथ जवाब देने के लिए तैयार है।

यह जुबानी हमला 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के दौरान किया गया। इस्लामाबाद में विदेशी राजदूतों और राजनयिकों को संबोधित करते हुए इशाक डार ने आरोप लगाया कि भारत एक सोची-समझी रणनीति के तहत सिंधु जल संधि के स्थापित मानदंडों का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने चिनाब और झेलम नदियों के प्रवाह में आ रहे "अनियमित उतार-चढ़ाव" को भारत द्वारा संधि के उल्लंघन का प्रमाण बताया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने ले जाते हुए कहा कि क्षेत्रीय शांति को किसी एक देश की "नफरत और विभाजन की राजनीति" का बंधक नहीं बनाया जा सकता।

उल्लेखनीय है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में जल कूटनीति पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रसिद्ध बयान, "खून और पानी साथ नहीं बह सकते", पाकिस्तान के लिए एक निरंतर चिंता का विषय बना हुआ है। भारत ने संधि के उन प्रावधानों का उपयोग करने के संकेत दिए हैं जो पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद के जवाब में जल प्रवाह को नियंत्रित करने की अनुमति देते हैं। इशाक डार ने भारत द्वारा संधि को एकतरफा निलंबित करने की संभावना पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ सहित कई अन्य नेताओं ने भी इसी तरह के तीखे बयान जारी किए हैं। पाकिस्तानी नेतृत्व अपनी घरेलू जनता के सामने यह दिखाने का प्रयास कर रहा है कि वे भारत की किसी भी "आक्रामकता" का जवाब देने में सक्षम हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह बयान भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में बनाए जा रहे पनबिजली परियोजनाओं और संधि के कानूनी पहलुओं पर भारत के हालिया दबाव से उपजी बौखलाहट का परिणाम है।

संधि की तकनीकी और कानूनी जटिलताओं के बीच, इशाक डार की यह "युद्ध की कार्रवाई" वाली टिप्पणी दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को फिर से गरमा सकती है। भारत ने फिलहाल इन धमकियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन नई दिल्ली का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि सिंधु जल संधि का कार्यान्वयन द्विपक्षीय सहयोग और आतंकवाद मुक्त वातावरण पर निर्भर करता है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान उस विवादित जलमार्ग की ओर खींचा है, जो दोनों देशों के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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