35 साल के रैपर ने कैसे बदल दी पूरी सियासत? जानें क्या 'ग्रेटर नेपाल' का सपना होगा पूरा
नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां युवा नेता बालेंद्र ‘बालेन’ शाह 2026 के चुनावों में अपनी पार्टी की बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री बनने की दहलीज पर हैं। उनके उभार के साथ ही 2023 का ‘ग्रेटर नेपाल’ नक्शा विवाद फिर चर्चा में है।

युवा नेता बालेंद्र ‘बालेन’ शाह
नेपाल की राजनीति इस समय एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। युवा नेता बालेंद्र ‘बालेन’ शाह का तेजी से उभार देश के पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को बदलता नजर आ रहा है। 2026 के संसदीय चुनावों में उनकी पार्टी के शानदार प्रदर्शन के बाद शाह अब नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की दहलीज पर खड़े हैं। हालांकि, उनके संभावित सत्ता में आने के साथ ही एक पुराना विवाद ‘ग्रेटर नेपाल’ के नक्शे से जुड़ा मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है, जिसने भारत-नेपाल संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
हाल ही में हुए आम चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी – RSP) ने अप्रत्याशित सफलता हासिल की है। शुरुआती रुझानों और परिणामों के अनुसार पार्टी ने बड़ी संख्या में संसदीय सीटें जीतकर दशकों से राजनीति पर हावी पारंपरिक दलों को पीछे छोड़ दिया है। इस जीत ने नेपाल की राजनीति में एक नई पीढ़ी के नेतृत्व के उभरने का संकेत दिया है। महज 35 वर्ष की उम्र में बालेन शाह देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने की संभावना के साथ सुर्खियों में हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, शाह का उभार अचानक नहीं हुआ। वर्ष 2025 में नेपाल में युवाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ व्यापक असंतोष को उजागर किया था। इन आंदोलनों ने पारंपरिक राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता को चुनौती दी और एक नए नेतृत्व की मांग को मजबूत किया। इसी पृष्ठभूमि में बालेन शाह का राजनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ता गया।
बालेंद्र शाह का राजनीतिक सफर भी असामान्य रहा है। वे मूल रूप से एक रैपर और पेशे से स्ट्रक्चरल इंजीनियर रहे हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर काठमांडू के मेयर का पद जीता था, जो उस समय नेपाल की राजनीति में एक अप्रत्याशित परिणाम माना गया था। बाद में 2025 के अंत में उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में शामिल होकर 2026 के चुनाव में प्रधानमंत्री पद के प्रमुख उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।
इस चुनाव में शाह ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली को हराकर बड़ी राजनीतिक उपलब्धि हासिल की। उनकी साफ-सुथरी छवि, भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े रुख और पारंपरिक राजनीति से अलग पहचान ने खासकर युवा और जेन-ज़ी मतदाताओं के बीच उन्हें बेहद लोकप्रिय बना दिया। हालांकि, शाह के संभावित प्रधानमंत्री बनने के साथ ही एक पुराना विवाद भी फिर चर्चा में आ गया है। वर्ष 2023 में काठमांडू के मेयर रहते हुए उन्होंने अपने कार्यालय में ‘ग्रेटर नेपाल’ का नक्शा प्रदर्शित किया था। इस नक्शे में ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर ऐसे कुछ क्षेत्रों को दर्शाया गया था, जो वर्तमान में भारत के हिस्से हैं। उस समय इस कदम को नेपाल के भीतर राष्ट्रवादी भावना के प्रतीक के रूप में देखा गया, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर इसने कूटनीतिक संवेदनशीलता भी पैदा कर दी थी।
कई विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम उस समय भारत की नई संसद भवन में प्रदर्शित ‘अखंड भारत’ के मानचित्र की प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा गया था। हालांकि, दोनों देशों के आधिकारिक स्तर पर इस मुद्दे को ज्यादा तूल नहीं दिया गया, लेकिन यह विषय समय-समय पर राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का हिस्सा बनता रहा है। अब जब शाह राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष पद की ओर बढ़ रहे हैं, तो यह पुराना विवाद फिर से चर्चा में है।
भारत और नेपाल के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से बेहद गहरे माने जाते हैं। दोनों देशों के बीच ‘रोटी-बेटी’ के संबंधों की बात अक्सर की जाती है। ऐसे में नेपाल में नेतृत्व परिवर्तन और नए राजनीतिक दृष्टिकोण का असर क्षेत्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बालेन शाह की सरकार को भारत और चीन के बीच संतुलन बनाकर विदेश नीति को आगे बढ़ाने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल, दोनों देशों के कूटनीतिक हलकों में यह संकेत दिए जा रहे हैं कि सहयोग और संवाद की परंपरा को बनाए रखा जाएगा। नेपाल की राजनीति में बालेन शाह का उभार केवल एक नए नेता का सत्ता तक पहुंचना नहीं, बल्कि देश में युवा नेतृत्व, नई राजनीति और बदलते जनमत का प्रतीक भी माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह परिवर्तन नेपाल की घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय संबंधों को किस दिशा में ले जाता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
