पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर में टीएमसी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सापन सामंत को कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर स्थानीय लोगों ने जूतों की माला पहनाकर सड़क पर घुमाया, उठक-बैठक करवाई और अंडे-टमाटर फेंके। वायरल वीडियो के बाद यह घटना राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद बन गई है।

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर में सोमवार को उस समय राजनीतिक हलकों में सनसनी फैल गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व तारकेश्वर नगरपालिका अध्यक्ष सापन सामंत को कथित तौर पर स्थानीय लोगों ने जूतों की माला पहनाकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। इस पूरी घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिसके बाद मामला राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया।

बताया जा रहा है कि 23 जून 2026 को तारकेश्वर के कुछ स्थानीय निवासियों ने सापन सामंत को घेर लिया और उन पर भ्रष्टाचार तथा नगरपालिका कार्यकाल के दौरान अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध कर रहे लोगों ने कथित तौर पर उनके गले में जूतों की माला डाली और उन्हें सार्वजनिक रूप से सड़क पर चलने के लिए मजबूर किया। घटना के दौरान उन्हें कान पकड़कर उठक-बैठक करने के लिए भी कहा गया, जबकि आसपास मौजूद लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया।



समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में सापन सामंत बिना चप्पल और बिना शर्ट के सड़क पर चलते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कुछ देर बाद उन्हें कान पकड़कर उठक-बैठक करते हुए देखा जा सकता है। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा उन पर टमाटर और अंडे भी फेंके गए। बाद में पूर्व विधायक अपनी दोपहिया वाहन पर सवार होकर वहां से निकलते हुए दिखाई दिए।

सापन सामंत पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और तारकेश्वर नगरपालिका के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वह हुगली क्षेत्र में पार्टी के प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे हैं तथा पश्चिम बंगाल के रैना विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगरपालिका प्रशासन के दौरान सामंत के कार्यकाल में भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और विकास कार्यों में अनियमितताएं हुईं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कई नागरिक परियोजनाओं और प्रशासनिक फैसलों में गड़बड़ियां हुई थीं। हालांकि इन आरोपों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है और न ही किसी अदालत द्वारा आरोपों की पुष्टि की गई है। फिलहाल ये आरोप स्थानीय लोगों और विरोध प्रदर्शन में शामिल व्यक्तियों के दावों तक सीमित हैं।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में कुछ स्थानीय राजनीतिक नेताओं के खिलाफ जनता के विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। हाल के दिनों में कई स्थानों पर नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन, अंडे फेंकने और सार्वजनिक नाराजगी की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है।

घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस की ओर से सापन सामंत के सार्वजनिक अपमान को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की सत्यता अभी तक आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुई है और मामला सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है।

भारतीय राजनीति में किसी नेता को जूतों की माला पहनाना सार्वजनिक विरोध और अपमान का अत्यंत प्रतीकात्मक तरीका माना जाता है। तारकेश्वर की यह घटना केवल एक स्थानीय विरोध प्रदर्शन भर नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक जवाबदेही, भ्रष्टाचार के आरोपों पर जनता के आक्रोश और कानून व्यवस्था से जुड़े सवालों को भी सामने लाती है। वायरल वीडियो के बाद यह मामला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक प्रभावों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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