"पद्मविभूषण नहीं, ज्ञानेश कुमार को मिले भारत रत्न!" सिब्बल के तंज पर हिमंत बिस्वा सरमा का 'मास्टरस्ट्रोक' पलटवार।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के योगदान को देखते हुए उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान देने की वकालत की है।

बाएं से दाएं: कपिल सिब्बल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, जो ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की चर्चा के संदर्भ में दिखाए गए हैं।
पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में राजनीतिक बयानबाजी का पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के एक हालिया बयान पर तीखा पलटवार किया है। दरअसल, यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर शुरू हुआ, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल के अमरहाटी में चुनावी प्रचार के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत रत्न से नवाजा जाना चाहिए।
सरमा का यह बयान कपिल सिब्बल के उस कटाक्ष के जवाब में आया है, जिसमें सिब्बल ने ज्ञानेश कुमार को 'पद्म विभूषण' देने की मांग करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। सरमा ने सिब्बल के तंज को ही आधार बनाकर इसे और व्यापक रूप दे दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्ञानेश कुमार ने देश में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को जिस कुशलता के साथ पूरा किया है, वह सराहनीय है और इसके लिए वे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के हकदार हैं। मुख्यमंत्री ने केवल प्रशंसा ही नहीं की, बल्कि यह मांग भी दोहराई कि असम में भी इसी तर्ज पर एसआईआर प्रक्रिया को कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार, जो 1988 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं, उनकी नियुक्ति के समय से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल रही है। केंद्र सरकार ने 19 फरवरी, 2025 को उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्त किया था। उनकी नियुक्ति पर कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई थी, क्योंकि ज्ञानेश कुमार ने इससे पहले गृह मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अधीन महत्वपूर्ण कार्य किए थे। विपक्ष ने इसी पृष्ठभूमि को आधार बनाकर उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे, लेकिन ज्ञानेश कुमार ने पद संभालने के बाद बिहार समेत 12 राज्यों में एसआईआर को लागू कर अपनी सक्रियता का परिचय दिया।
असम के मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल की चुनावी जनसभाओं में न केवल चुनाव आयोग का बचाव किया, बल्कि आगामी परिणामों को लेकर भी बड़ी भविष्यवाणी की। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद उन तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने चुनावी प्रक्रिया के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों पर हमले किए हैं। सरमा ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि भाजपा असम में 100 से अधिक और पश्चिम बंगाल में 200 से अधिक सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की भूमिका और उस पर लगने वाले राजनीतिक आरोपों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग ने जिस तरह से राज्यों में मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण का अभियान छेड़ा है, उसने एक ओर प्रशासनिक कुशलता का उदाहरण पेश किया है, तो दूसरी ओर विपक्ष की आशंकाओं को भी जन्म दिया है। हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा उन्हें भारत रत्न देने की वकालत करना, असल में कपिल सिब्बल और कांग्रेस के हमलों को कुंद करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि चुनावी नतीजों के बाद यह राजनीतिक खींचतान क्या नया मोड़ लेती है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
