लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दायर कर दावा किया है कि उन्हें लगातार खुफिया एजेंसियों की निगरानी में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली से लेकर जेल तक, जहां भी वे जाती हैं, पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी उनका पीछा करते हैं। यह स्थिति उनके नागरिक और व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन है।


गीतांजलि ने बताया कि दिल्ली में 30 सितंबर से उनके हर कदम पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा, "जहां भी मैं जाती हूं, एक कार और एक बाइक सवार व्यक्ति मेरा पीछा करते हैं।" यह निगरानी, उनके अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि उन्हें जोधपुर में किसी और व्यक्ति से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। मुलाकात के बाद उन्हें रेलवे स्टेशन भेजा गया, जहां सुरक्षाकर्मी ट्रेन में भी दो घंटे तक साथ रहे। उन्होंने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया।


वांगचुक की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि वे “गांधीवादी और शांतिपूर्ण ढंग” से आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने अनुचित कार्रवाई की। वहीं, प्रशासन का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी सुरक्षा कारणों से की गई है। फिलहाल वांगचुक जोधपुर सेंट्रल जेल में हैं और उनकी हिरासत की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति जाँच कर रही है।

गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में अपने पति की गिरफ्तारी को अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि सोनम वांगचुक का आंदोलन पूरी तरह गांधीवादी और शांतिपूर्ण था, जो लद्दाख की पर्यावरणीय संवेदनशीलता और संविधान के अधिकारों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा था। उन्होंने कोर्ट से अपने पति की तत्काल रिहाई की मांग की है।


जस्टिस अरविंद कुमार और एन.वी. अंजारिया की पीठ 29 अक्टूबर को इस पर सुनवाई करेगी। अदालत ने अंगमो को अपनी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में संशोधन की अनुमति भी दी है।​ इस बीच, गीतांजलि ने अपनी अपील में कहा है कि सरकार “राष्ट्रीय सुरक्षा” के नाम पर शांतिपूर्ण आवाजों को दबा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि "क्या किसी साधारण नागरिक को अपने परिवार से मिलने या अपनी बात कहने का अधिकार भी अब खतरे में है?"
केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन ने वांगचुक की गिरफ्तारी का बचाव किया है। उनका कहना है कि यह कानूनी रूप से की गई कार्रवाई है, जो क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक थी। वहीं, नागरिक स्वतंत्रता पर यह बहस अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है, जिससे सुरक्षा और व्यक्तिगत आज़ादी के संतुलन पर नए सवाल खड़े हो रहे हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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