लोकसभा में कांग्रेस के विरोध और हंगामे के बीच G RAM G बिल को मिली मंजूरी, राजनीतिक विवाद बढ़ा
लोकसभा में G RAM G बिल पास होने के दौरान विपक्षी हंगामा, कांग्रेस नेताओं ने फाड़ी विधेयक की प्रतियां। नया बिल MGNREGA की जगह लेता है, ग्रामीण रोजगार की गारंटी 125 दिन तक सुनिश्चित करता है और रोजगार योजनाओं के कार्यान्वयन का ढांचा बदलता है।

लोकसभा में G RAM G बिल पास
संसद के हॉल में बुधवार को इतिहाससहित एक नाटकीय दृश्य देखने को मिला, जब लोकसभा ने ‘G RAM G बिल’ को मंजूरी दी। इस बिल का पूरा नाम है विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण। यह बिल लंबे समय से लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को बदलकर नई रूपरेखा प्रदान करता है। नए कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी अब 125 दिनों तक सुनिश्चित की जाएगी और ग्रामीण रोजगार योजनाओं के कार्यान्वयन की संरचना में बदलाव किया जाएगा।
बिल की पासिंग के दौरान सदन में तीव्र विरोध और हंगामे की स्थिति बनी। कई विपक्षी सांसद, विशेषकर कांग्रेस के नेता, जोरदार प्रदर्शन में शामिल हुए। विरोध प्रदर्शनों के दौरान विधेयक की प्रतियां फाड़ दी गईं और कुछ को सदन में फेंक दिया गया, जिससे हॉल में दृश्य अत्यधिक नाटकीय और उथल‑पुथल भरा बन गया।
G RAM G बिल क्या है:
G RAM G बिल MGNREGA का स्थान लेता है और ग्रामीण रोजगार के मौजूदा ढांचे में बदलाव लाता है। नया कानून रोजगार गारंटी को 125 दिन तक सुनिश्चित करता है, जबकि यह रोजगार कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और प्रबंधन के लिए एक संरचित और केंद्रीकृत प्रणाली का प्रस्ताव भी करता है। बिल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सुनिश्चित करना और आजीविका को मजबूत करना बताया गया है।
बिल के पारित होने के साथ ही अब सरकार ग्रामीण रोजगार और आजीविका योजनाओं को नई ढांचे के अनुसार लागू करेगी। इसमें स्थानीय प्रशासन, पंचायतों और राज्य सरकारों के माध्यम से रोजगार वितरण का नया तंत्र शामिल होगा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस बदलाव से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने बिल का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क है कि यह कानून ग्रामीण मजदूरों के मौलिक अधिकारों को कमजोर करता है और मौजूदा MGNREGA के तहत मिलने वाली कानूनी गारंटी को कमतर करता है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि बिल का नाम बदलना और गांधीजी के नाम को हटाना एक राजनीतिक प्रेरणा से प्रेरित कदम है। विरोध के दौरान सदन में उच्च आवाज़ में नारेबाजी और हंगामा देखने को मिला।
विपक्षी नेताओं ने कहा कि यह बिल ग्रामीण भारत में रोजगार की गारंटी को कमजोर कर रहा है और यह ग्रामीण जनता के लिए चिंता का विषय है। कांग्रेस नेताओं ने जोर देकर कहा कि MGNREGA का नाम बदलना और नई रूपरेखा लागू करना ग्रामीण समुदाय के हितों के विपरीत है। वहीं, सरकार का कहना है कि बिल ग्रामीण रोजगार को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इस पारित बिल के साथ ही अब भारत की ग्रामीण रोजगार नीति में एक नई शुरुआत हुई है। यह कदम न केवल ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी व्यापक स्तर पर देखने को मिलेंगे।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
